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मानव तस्करी की पीड़िता को ढाई लाख का अंतरिम मुआवजा
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नई दिल्ली। मानव तस्करी एवं दुष्कर्म मामले में पीड़िता को अंतरिम रूप से ढाई लाख रुपये मुआवजा प्रदान किया गया है। दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण ने यह जानकारी हाईकोर्ट को दी। अदालत ने इस तर्क पर मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। पीड़िता ने दिल्ली पीड़ित मुआवजा (डीवीसीे) योजना 2018 के तहत 19 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष प्राधिकरण ने बताया कि पीड़िता को सात अक्तूबर को अंतरिम मुआवजा प्रदान कर दिया गया है। अंतिम मुआवजा अदालत के आदेश के बाद ही दिया जा सकता है। अदालत ने उनके तर्क को स्वीकार करते हुए सुनवाई नौ फरवरी 2022 तक स्थगित कर दी।
वहीं पीड़िता की ओर से पेश अधिवक्ता जोसी मिलुन्जो ने तर्क रखा कि डीवीसी योजना के तहत अंतिम मुआवजा निचली अदालत के फैसले के बिना दिया जा सकता है। इसे रिकॉर्ड पर रखने के लिए उन्होंने समय मांगा।
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याचिकाकर्ता महिला ने कहा है कि वह मेघालय के एक गांव के दूरदराज के इलाके में रहने वाले गरीब और कमजोर परिवार से संबंध रखती है। उसे उसका चचेरा भाई नौकरी के बहाने बहला-फुसलाकर तस्करी कर दिल्ली ले आया। दिल्ली लाकर उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर पीड़िता से यहां देह व्यापार करवाया। यह लोग देह व्यापार का रैकेट चला रहे हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नाबालिगों समेत सैकड़ों लड़कियों की तस्करी कर उनका यौन शोषण किया गया। महिला ने कहा कि उसे पिछले साल जनवरी में 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर यहां खाना बनाने की नौकरी दिलाने के बहाने लाया गया था। यहां पहुंचने पर उसे एक फ्लैट में ले जाया गया जहां एक शख्स ने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया।
इसके बाद उसे कई अन्य लोगों को बेच दिया और उनके द्वारा यौन शोषण किया गया। वह फरवरी 2020 में भागने में कामयाब रही। अपने दोस्त और अन्य लोगों की मदद से मालवीय नगर थाने में संपर्क किया और एफआईआर दर्ज कराई।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष प्राधिकरण ने बताया कि पीड़िता को सात अक्तूबर को अंतरिम मुआवजा प्रदान कर दिया गया है। अंतिम मुआवजा अदालत के आदेश के बाद ही दिया जा सकता है। अदालत ने उनके तर्क को स्वीकार करते हुए सुनवाई नौ फरवरी 2022 तक स्थगित कर दी।
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वहीं पीड़िता की ओर से पेश अधिवक्ता जोसी मिलुन्जो ने तर्क रखा कि डीवीसी योजना के तहत अंतिम मुआवजा निचली अदालत के फैसले के बिना दिया जा सकता है। इसे रिकॉर्ड पर रखने के लिए उन्होंने समय मांगा।
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याचिकाकर्ता महिला ने कहा है कि वह मेघालय के एक गांव के दूरदराज के इलाके में रहने वाले गरीब और कमजोर परिवार से संबंध रखती है। उसे उसका चचेरा भाई नौकरी के बहाने बहला-फुसलाकर तस्करी कर दिल्ली ले आया। दिल्ली लाकर उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर पीड़िता से यहां देह व्यापार करवाया। यह लोग देह व्यापार का रैकेट चला रहे हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नाबालिगों समेत सैकड़ों लड़कियों की तस्करी कर उनका यौन शोषण किया गया। महिला ने कहा कि उसे पिछले साल जनवरी में 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर यहां खाना बनाने की नौकरी दिलाने के बहाने लाया गया था। यहां पहुंचने पर उसे एक फ्लैट में ले जाया गया जहां एक शख्स ने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया।
इसके बाद उसे कई अन्य लोगों को बेच दिया और उनके द्वारा यौन शोषण किया गया। वह फरवरी 2020 में भागने में कामयाब रही। अपने दोस्त और अन्य लोगों की मदद से मालवीय नगर थाने में संपर्क किया और एफआईआर दर्ज कराई।