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हाईकोर्ट : व्यक्तिगत स्वतंत्रता पोषित संवैधानिक स्वतंत्रताओं में से एक

Thu, 06 Jan 2022 02:12 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jan 2022 02:12 AM IST
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Individual liberty one of the cherished constitutional freedom, High Court says
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संवैधानिक स्वतंत्रताओं में से एक है। एक बार अभियुक्त को दी गई जमानत केवल गंभीर और विकट परिस्थितियों में ही वापस लेनी चाहिए। अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए दहेज प्रताड़ना, छेड़छाड़ के आरोप में पति, ससुर, सास व देवर की अग्रिम जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया।
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न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने महिला के उस तर्क को खारिज कर दिया कि निचली अदालत ने आरोपियों को गलत तरीके से अग्रिम जमानत दी जबकि अभी भी उन्होंने तीन करोड़ के जेवरात वापस नहीं किए। अदालत ने कहा जमानत यानि स्वतंत्रता को वापस लेने से पहले अदालत को सावधानी पूर्वक तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए।
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पीठ ने कहा कि पहले से दी गई जमानत को चुनौती देने वाले पक्ष को सबूत दिखाकर यह साबित करने की जरूरत है कि जमानत पाने वाला व्यक्ति पीड़िता को धमकी दे रहा है। पीड़ित या उसके परिवार को व्यक्तिगत नुकसान पहुंचा सकता है, सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रहा है या अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित कर रहा है।
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उन्होंने कहा अदालत को यह दिखाना जरूरी है कि आरोपी अदालत द्वारा उसे दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहा है। जमानत देने के आदेश को रद्द करने के लिए न्यायालय द्वारा अधिक चौकस रहने का एक अन्य कारण यह है कि इसमें जमानत के सुविचारित, तर्कसंगत न्यायिक आदेश की समीक्षा शामिल है।
जमानत रद्द करने का आवेदन जमानत देने के आवेदन से अलग है। जमानत देने के आदेश को चुनौती देने वाले आवेदन पर विचार करते समय न्यायालय को यह देखना होता है कि जमानत देने के आदेश का उल्लंघन किसी गंभीर दुर्बलता से हुआ है या नहीं। पीड़ित के पास आरोपी द्वारा फैसले का उल्लंघन करने पर अदालत का दरवाजा हमेशा खुला होता है।

मामले में आरोपियों को अग्रिम जमानत निचली अदालत ने तब दी जब उन्होंने स्त्रीधन व बीएमडब्ल्यू वापस कर दी थी। निचली अदालत ने माना कि पीड़िता ने न तो तीन करोड़ रुपये के बिल दिए न ही उसके पिता ने आयकर रिटर्न भरी। इसके अलावा मामले में आरोपपत्र दायर हो चुका है और उनसे हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है।
अदालत ने कहा ऐसे में जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं है।
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