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आईआईटी दिल्ली ने तलाशा जीरो प्रदूषण का हल, क्लासिक विंटेज कार को इलेक्ट्रिक कार में किया तब्दील 

Mon, 08 Feb 2021 11:09 AM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Mon, 08 Feb 2021 11:09 AM IST
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IIT Delhi solved zero pollution converted old car into electric car
पुरानी कार को इलेक्ट्रिक कार में किया तब्दील - फोटो : अमर उजाला
आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक ने 1948 की क्लासिक विंटेज कार को इलेक्ट्रिक कार में तब्दील करके जीरो प्रदूषण का हल तलाशा है। सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर रिसर्च ऑन क्लीन एयर के प्रमुख वैज्ञानिक व प्रोफेसर हेमंत कौशल का कहना है कि केंद्र सरकार को कबाड़ नीति में संशोधन करके पुरानी कारों को सड़कों से हटाने की बजाय और पेट्रोल-डीजल ईंजन की बजाय इलेक्ट्रिक कार में तब्दील करने की योजना बनानी चाहिए। इससे जहां आम मध्यम वर्गीय परिवारों को 15 साल बाद कार बदलने का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। वहीं, रोजगार के मौके बढ़ेंगे। इससे प्रदूषण की रोकथाम भी संभव है।
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आईआईटी दिल्ली ने शनिवार को इस विंटेज क्लासिक कार को इलेक्ट्रिक अवतार के रूप में डाक टिकट पर भी पहचान दिलवाई है। इसका मकसद आम लोगों तक इस पुरानी कार के नए अवतार को पहुंचाना है, ताकि पुरानी कार प्रेमी अपनी इन विंटेज कार को गैरज की बजाय सड़कों पर इलेक्ट्रिक कार के रूप में दुनिया को परिचय करवाएं।
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इलेक्ट्रिक रेट्रो फीट दिया नाम
प्रो. कौशल ने बताया कि इस विंटेज क्लासिक कार में पेट्रोल ईंजन को हटाकर बैटरी और मोटर फीट की गई है। इसे इलेक्ट्रिक रेट्रो फीट का नाम दिया गया है। इसमें कुल 4 से साढ़े चार लाख रुपये तक का खर्चा आया है। एक बार बैटरी चार्ज होने पर यह 60 से 70 किलोमीटर तक चल सकती है। जबकि इस दौरान जीरो प्रदूषण होगा।
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आत्मनिर्भर भारत में ऐसी पॉलिसी की मांग
सरकार का पूरा फोकस इलेक्ट्रिक कारों पर है। हालांकि अभी इसमें प्रयोग होने वाली बैटरी और मोटर सब विदेश से मंगवानी पड़ती है। इसके चलते इसकी लागत बेहद ज्यादा होती है। इसीलिए फिलहाल इलेक्ट्रिक कार बेहद मंहगी पड़ती है। हालांकि सरकार धीरे-धीरे बैटरी चार्जिंग स्टेशन बना रही है। लेकिन उससे पहले बैटरी और मोटर बनाने पर फोकस करना होगा। इसके चलते रोजगार के मौक भी बढ़ेंगे और बैटरी भी सस्ती बनेगी।


इसके साथ ही 15 साल तक वाहन को मिलने वाला रजिस्ट्रेश्श्न आगे बढ़ाना होगा। यानी जब किसी वाहन के 15 साल पूरे हो तो उसे कबाड़ में भेजने की बजाय उसकी फिटनेस को देखते हुए इलेक्ट्रिक कार में तब्दील करने का विकल्प होना चाहिए। इससे धीरे-धीरे आम लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर जोर देंगे। इसमें खर्चा कम, प्रदूषण में कमी आएगी।
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