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आईआईटी दिल्ली का कमाल : पानी की बूंदों से बनेगी बिजली, चार्ज करें छोटे विद्युत उपकरण
Sun, 19 Sep 2021 06:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 19 Sep 2021 06:32 AM IST
सार
आईआईटी दिल्ली ने तैयार की नैनोजरनेटर डिवाइस। शोध में खुलासा- समुद्र के खारे पानी से अधिक बिजली हो सकती है तैयार।
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विस्तार
अब पानी की बूंदों से बिजली भी तैयार होगी। दरअसल आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने पानी की बूंदों से बिजली बनाने के लिए डिवाइस तैयार कराया है, जो ट्राइबोइलेक्ट्रिक इफेक्ट और इलेक्ट्रोस्टैटिक इंडक्शन का उपयोग करके पानी की बूंदों, बारिश की बूंदों, पानी की धाराओं और यहां तक कि समुद्र की लहरों से भी बिजली पैदा कर सकता है
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नैनोजनरेटर कुछ मिलीवाट बिजली पैदा करेगा। इसकी मदद से छोटे विद्युत उपकरण जैसे मोबाइल, घड़ी, डिजिटल थर्मामीटर, रेडियो, हेल्थ केयर सेंसर, पैडोमीटर चार्ज किया जा सकेगा। वर्तमान उपकरण सहित यांत्रिक ऊर्जा के संचयन के लिए फेरोइलेक्ट्रिक पॉलीमर के उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर एक भारतीय पेटेंट भी दायर किया है।
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आईआईटी दिल्ली के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. नीरज खरे और संस्थान की ही नैनोस्केल रिसर्च फैसिलिटी (एनआरएफ) ट्राइबोइलेक्ट्रिक प्रभाव का उपयोग करके व्यर्थ यांत्रिक कंपन से विद्युत ऊर्जा का संचयन करने पर काम कर रही है। प्रो. खरे के मुताबिक, आज मोबाइल समेत अन्य उपकरण जीवन का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन चार्जिंग की दिक्कत भी रही है। इस शोध में ऊर्जा संचयन के व्यावहारिक विकल्प के रूप में व्यापक रूप से जांच की गई। बारिश की बूंदे, पानी की भाप यहां तक की समुद्र की लहरों से भी बिजली बनाई जा सकती है।
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इसे लिक्विड सालिड इंटरफेस ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजनरेटर का नाम दिया गया है। इसमें ट्राइबोइलेक्ट्रिक इफेक्ट और इलेक्ट्रोस्टैटिक इंडक्शन विधि से बिजली बनेगी। इस डिवाइस का डिजाइन बहुत ही साधारण है। यह ट्राइबोइलेक्ट्रिक इफेक्ट पर आधारित है। ट्राइबोइलेक्ट्रिक में दो सतहों के बीच संपर्क होने पर घर्षण होता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण हम कंबल के रूप में देख सकते हैं।
सर्दियों में कई बार कंबल, जैकेट को रगड़ने पर जगमगाती लाइटें दिखती हैं। यह डिवाइस भी इन्ही नियम पर काम करता है। इसमें एक नैनो कंपोजिट पालीमर फिल्म और दो इलेक्ट्रोड लगे होते हैं। डिवाइस की सतह खुरदरी है। इनकी मदद से पानी की बूंदों से बिजली बनती है।
डिवाइस बिजली का संग्रहण भी करेगा। पारंपरिक तरीकों की तुलना में, जैसे कि पीजोइलेक्ट्रिक प्रभाव का उपयोग, यह काफी अधिक बिजली उत्पन्न कर सकता है। इस शोध में वज्ञिन और प्रौद्योगिकी मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सहयोग दिया है।