{"_id":"616a622e7196b133187f89c1","slug":"hope-of-relief-from-air-pollution-in-delhi-ncr-this-year-this-time-there-is-a-big-reduction-in-the-cases-of-stubble-burning","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Delhi Air Pollution: इस साल वायु प्रदूषण से राहत के आसार, पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार पराली जलाने के मामलों में बड़ी कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi Air Pollution: इस साल वायु प्रदूषण से राहत के आसार, पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार पराली जलाने के मामलों में बड़ी कमी
Sat, 16 Oct 2021 12:44 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 16 Oct 2021 12:44 PM IST
सार
केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है कि इस बार बीते एक माह में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत पांच राज्यों में पराली जलाने के कुल 1,795 मामले ही सामने आए हैं जबकि पिछले साल इसी समय अवधि में 4,854 घटनाएं हुई थीं। वहीं, दिल्ली और राजस्थान में पराली जलाने का कोई भी मामला सामने नहीं आया।
विज्ञापन
दिल्ली में खुले में हो रहा निर्माण कार्य
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस साल पराली जलाने के मामलों में आई खासी कमी के चलते अक्तूबर के तीसरे हफ्ते तक दिल्ली समेत समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को वायु प्रदूषण से राहत मिलती दिख रही है।
केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है कि इस बार बीते एक माह में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत पांच राज्यों में पराली जलाने के कुल 1,795 मामले ही सामने आए हैं जबकि पिछले साल इसी समय अवधि में 4,854 घटनाएं हुई थीं। वहीं, दिल्ली और राजस्थान में पराली जलाने का कोई भी मामला सामने नहीं आया।
आयोग के मुताबिक, पराली जलाने के मामले पंजाब में 64.49 फीसदी, हरियाणा में 18.28 फीसदी और एनसीआर में शामिल उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में 47.61 फीसदी घटे हैं। सीएक्यूएम का यह आंकड़ा एनसीआर और उससे जुड़े इलाकों के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा जारी प्रोटोकॉल पर आधारित है। आयोग ने 15 सितंबर से 14 अक्तूबर तक पराली जलाने को ले्कर की गई निगरानी के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इसमें धान के अवशेष जलाने की घटनाएं और उनका सही समय पंजीकृत है।
विज्ञापन
252 मामलों में लगाया जुर्माना
आयोग का कहना है, लगातार प्रयास और राज्यों के सहयोग से किसान को जागरूक करने के नतीजे मिलने लगे हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में धान के अवशेष जलाने की घटनाओं में इस साल काफी कमी आई है। पराली को जलने से रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की जमीनी हकीकत जानने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों ने मौका मुआयना भी किया है।
विज्ञापन
केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है कि इस बार बीते एक माह में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत पांच राज्यों में पराली जलाने के कुल 1,795 मामले ही सामने आए हैं जबकि पिछले साल इसी समय अवधि में 4,854 घटनाएं हुई थीं। वहीं, दिल्ली और राजस्थान में पराली जलाने का कोई भी मामला सामने नहीं आया।
विज्ञापन
आयोग के मुताबिक, पराली जलाने के मामले पंजाब में 64.49 फीसदी, हरियाणा में 18.28 फीसदी और एनसीआर में शामिल उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में 47.61 फीसदी घटे हैं। सीएक्यूएम का यह आंकड़ा एनसीआर और उससे जुड़े इलाकों के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा जारी प्रोटोकॉल पर आधारित है। आयोग ने 15 सितंबर से 14 अक्तूबर तक पराली जलाने को ले्कर की गई निगरानी के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इसमें धान के अवशेष जलाने की घटनाएं और उनका सही समय पंजीकृत है।
विज्ञापन
252 मामलों में लगाया जुर्माना
आयोग का कहना है, लगातार प्रयास और राज्यों के सहयोग से किसान को जागरूक करने के नतीजे मिलने लगे हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में धान के अवशेष जलाने की घटनाओं में इस साल काफी कमी आई है। पराली को जलने से रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की जमीनी हकीकत जानने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों ने मौका मुआयना भी किया है।
Trending Videos
अभी तक एजेंसियों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा के सभी जिलों में 663 घटना स्थलों पर पहुंचकर निरीक्षण किया है। इनमें से 252 मामलों में पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया।
पंजाब अब भी ऊपर, आयोग की नजर
इस साल पंजाब में पराली जलाने की 1,286 घटनाएं हुईं जबकि पिछले साल इस दौरान वहां यह आंकड़ा 4,216 था। वहीं, हरियाणा में पिछले साल ऐसी 596 घटनाएं हुई थीं, जो इस साल घटकर 487 हो गईं। उत्तर प्रदेश के आठ एनसीआर जिलों में बीते साल 42 घटनाओं के मुकाबले इस बार 22 मामले ही दर्ज हुए हैं। वहीं, दिल्ली और राजस्थान में अब तक पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया।
सीक्यूएम द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है, पंजाब पराली जलाने के लिहाज से खासा संवेदनशील है। हर साल राज्य के अमृतसर, तरनतारन, पटियाला और लुधियाना से ही 72 फीसदी मामले सामने आते हैं। इसी तरह हरियाणा के करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र में पराली जलाने की 80 फीसदी घटनाएं दर्ज की जाती हैं।
आगामी कुछ हफ्ते अहम
वायु गुणवत्ता आयोग का कहना है, आगामी कुछ हफ्तों में फसल की कटाई चरम पर होगी। लेकिन राज्य सरकारें पराली जलाने की समस्या से प्रभावी रूप से निपटने के लिए कदम उठा रही हैं।
कटाई के दौरान वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए आयोग 15 सितंबर से पराली जलाने वाली जगहों पर सक्रियता से नजर रख रहा है। साथ ही हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के उपायुक्तों समेत अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें भी कर रहा है। वहीं, इसरो सैटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखे हुए है। इसके अलावा आयोग में निगरानी नियंत्रण के लिए एक प्रोटोकॉल भी विकसित किया गया है।
पंजाब अब भी ऊपर, आयोग की नजर
इस साल पंजाब में पराली जलाने की 1,286 घटनाएं हुईं जबकि पिछले साल इस दौरान वहां यह आंकड़ा 4,216 था। वहीं, हरियाणा में पिछले साल ऐसी 596 घटनाएं हुई थीं, जो इस साल घटकर 487 हो गईं। उत्तर प्रदेश के आठ एनसीआर जिलों में बीते साल 42 घटनाओं के मुकाबले इस बार 22 मामले ही दर्ज हुए हैं। वहीं, दिल्ली और राजस्थान में अब तक पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया।
सीक्यूएम द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है, पंजाब पराली जलाने के लिहाज से खासा संवेदनशील है। हर साल राज्य के अमृतसर, तरनतारन, पटियाला और लुधियाना से ही 72 फीसदी मामले सामने आते हैं। इसी तरह हरियाणा के करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र में पराली जलाने की 80 फीसदी घटनाएं दर्ज की जाती हैं।
आगामी कुछ हफ्ते अहम
वायु गुणवत्ता आयोग का कहना है, आगामी कुछ हफ्तों में फसल की कटाई चरम पर होगी। लेकिन राज्य सरकारें पराली जलाने की समस्या से प्रभावी रूप से निपटने के लिए कदम उठा रही हैं।
कटाई के दौरान वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए आयोग 15 सितंबर से पराली जलाने वाली जगहों पर सक्रियता से नजर रख रहा है। साथ ही हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के उपायुक्तों समेत अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें भी कर रहा है। वहीं, इसरो सैटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखे हुए है। इसके अलावा आयोग में निगरानी नियंत्रण के लिए एक प्रोटोकॉल भी विकसित किया गया है।