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हिंदी हैं हम : मधुर संवाद का माध्यम भी है राष्ट्रभाषा, बनाती है भावनात्मक रिश्ते
Sun, 22 Aug 2021 06:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 22 Aug 2021 06:45 AM IST
सार
- पुलिस अधिकारी से लेकर शिक्षक तक मानते हैं हिंदी का महत्व
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हिंदी हैं हम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदी सिर्फ भाषा तक ही सीमित नहीं है बल्कि आम लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाए हुए है। आपसी संवाद में मधुरता को स्थापित करने के लिए हिंदी एक बेहतर व सुलझा हुआ माध्यम है। यही वजह है कि जनमानस में भावनात्मक रिश्तों को स्थापित करने के लिए लोग बोलचाल में हिंदी का इस्तेमाल करते हैं। अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत पुलिस व शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्ध लोगों ने हिंदी को लेकर अपने विचार साझा किए।
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आमजन की भाषा है हिंदी
पुलिस विभाग में हिंदी भाषा का प्रयोग काफी महत्वपूर्ण है। आपराधिक जांच से लेकर अन्य मामलों में हिंदी इस्तेमाल की जाती है। यहां तक की मामले को दर्ज करने के लिए भी एफआईआर की कॉपी हिंदी में लिखी जाती है। काफी समय से पुलिस में शिकायत दर्ज करने के लिए उर्दू के शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। अब इसे लेकर सोच बदल रही है। उर्दू शब्दों की जगह पुलिस हिंदी के शब्दों के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। पुलिस की कोशिश रहती है कि विभाग में प्रायोगिक हिंदी का इस्तेमाल किया जाए। पुलिस प्रशिक्षण के दौरान भी पुलिसकर्मियों को हिंदी के सरल शब्दों को लेकर समझाया जाता है। कई बार उर्दू के शब्दों को समझने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। विभाग की कोशिश रहती है कि हिंदी के आसान शब्दों को इस्तेमाल किया जाए, जिससे प्रत्येक व्यक्ति सहजता महसूस करे। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए पुलिस विभाग हिंदी पखवाड़े का भी आयोजन करता है। इस दौरान हिंदी लिखने व बोलने पर ही जोर दिया जाता है। हिंदी का अपना एक स्थान है, जिसकी जगह कोई अन्य दूसरी भाषा नहीं ले सकती है। यह आमजन की भाषा है, इसे समाज में बढ़ावा मिलना चाहिए।
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-आर पी मीणा, दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त
विशेषताओं से लैस है हिंदी
मेरी प्राथमिक शिक्षा कांवेंट स्कूल से पूरी हुई है। इस वजह से शुरू से ही अंग्रेजी में बोलना व लिखना रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय में जब शिक्षिका के तौर पर शुरुआत हुई तो हिंदी माध्यम के बच्चों को पढ़ाने का
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अवसर मिला। इसके लिए मैंने हिंदी सीखने के लिए कदम बढ़ाएं। क्योंकि, कॉलेज में उत्तरप्रदेश व बिहार मूल के विद्यार्थी भी अध्ययन करने के लिए आते हैं। यहां के कुछ विद्यार्थी हिंदी में अधिक सहजता महसूस करते हैं। ऐसे में यह मेरी भी जिम्मेदारी है कि मैं जो कुछ पढ़ा रही हूं। वह उन्हें समझ में भी आना चाहिए। इसलिए पढ़ाई के दौरान द्वीभाषीय लेक्चर का इस्तेमाल किया जाता है। जिन विद्यार्थियों को हिंदी समझ में आती है। उनसे हिंदी में वार्तालाप करने के साथ पठन के दौरान भी हिंदी में विषयों को समझाया जाता है। भूगोल विषय में ऊच स्तर पर सामाग्री को लेकर हिंदी व अंग्रेजी में सामानता है। हर भाषा की अपनी विशेषता होती है। हिंदी की भी अपनी विशेषता है और यह लोगों के बीच अधिक बोले जाने वाली भाषा है।
-डॉ. अमृता बजाज, भूगोल विभाग, शहीद भगत सिंह कॉलेज