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हाईकोर्ट ने माना कि दिशा रवि के मामले में हुई सनसनी फैलाने वाली व प्रतिकूल रिपोर्टिंग

Fri, 19 Feb 2021 06:46 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 19 Feb 2021 06:46 PM IST
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high court says media reporting was sensational and adverse in Disha Ravi case
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने माना कि जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि के खिलाफ एफआईआर में जांच की कुछ मीडिया कवरेज ने किसानों के विरोध का समर्थन करने वाले टूलकिट को साझा करने में कथित रूप से शामिल होने के मामले में सनसनी फैलाने और प्रतिकूल रिपोर्टिंग की गई है। अदालत ने हालांकि वर्तमान में समाचार सामग्री व ट्वीट को हटाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसी कोई भी सामग्री लीक न हो जिससे जांच प्रभावित हो।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा इस तरह की समाचार सामग्री और ट्वीट्स को हटाने की अंतरिम याचिका पर बाद में विचार किया जाएगा। इतना ही नहीं अदालत ने मीडिया घरानों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोई लीक जांच सामग्री प्रसारित न हो क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
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अदालत ने दिल्ली पुलिस को पेश उस शपथपत्र पर अपने रुख का पालन करने का निर्देश दिया है कि उसने न तो कोई जांच सामग्री लीक की है और न ही प्रेस को कोई जांच विवरण लीक करना चाहती है। अदालत ने पुलिस को मामले से जुड़े संवाददाता सम्मेलन करने की भी इजाजत प्रदान करते हुए कहा कि तय कानून का पालन किया जाना जरूरी है।
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अदालत ने कहा कि पुलिस व मीडिया के लिए 1 अप्रैल 2010 को गृह मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन का पालन करे। अदालत ने मीडिया घरानों को भी निर्देश दिया कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके स्रोतों से प्राप्त जानकारी प्रामाणिक हो और केवल सत्यापित सामग्री का प्रचार किया जाना चाहिए और यह भी ऐसे कि जांच में बाधा न आए।

अदालत रवि की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पुलिस को उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में किसी भी जांच सामग्री को मीडिया में लीक करने से रोकने का आग्रह किया गया था। याचिका में मीडिया को उसके और तीसरे पक्ष के बीच व्हाट्सएप पर उन लोगों सहित किसी भी निजी चैट की सामग्री निकालने से रोकने की भी मांग की गई है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने शपथपत्र दायर कर बताया कि उनकी और से प्राथमिकी व जांच से जुड़े तथ्यों की जानकारी किसी भी प्रकार से मीडिया को नहीं दी गई।
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