{"_id":"6096e2118ebc3e8dab49b874","slug":"high-court-refuses-to-grant-to-bail-accused-of-ankit-sharma-murder-case-ashram-news-noi580933451","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली दंगा: आईबी अधिकारी की हत्या में लिप्त दो आरोपियों को जमानत नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली दंगा: आईबी अधिकारी की हत्या में लिप्त दो आरोपियों को जमानत नहीं
विज्ञापन
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगों के दौरान आईबी के अधिकारी की हत्या के मामले में दो आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि चश्मदीद गवाहों व मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सहानुभूति के हकदार नहीं है।
न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अपने फैसले में आरोपी समीर व कासिम के इस तर्क को खारिज कर दिया कि उन्हें मामले में फर्जी फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। अदालत ने कहा कि दंगों में आईबी के युवा अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी। अदालत ने कहा कि चश्मदीद तीन गवाहों के बयानों में आरोपियों की दंगों में भूमिका स्पष्ट है। अदालत ने कहा कि जहां तक सीसीटीवी फुटेज की बात है दंगों के दौरान भीड़ ने उसे तोड़ दिया।
अदालत ने कहा कि मामले में आरोपपत्र दायर हो चुका है और ट्रायल चल रहा है। ऐेसे में आरोपी अपना पक्ष ट्रायल कोर्ट के समक्ष रख सकते हैं। वर्तमान में वे जमानत के हकदार नहीं है।
विज्ञापन
वहीं आरोपियों के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किलों को फर्जी मामले में फंसाया गया है और न तो उनके खिलाफ कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य है न ही कोई गवाह। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है जिसमें उनके मुवक्किल दिखाई दे रहे हो। चश्मदीद गवाहों ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयानों में उनके मुवक्किलों के खिलाफ कुछ नहीं कहा। ऐसे में जमानत स्वीकार की जाए।
वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह मामला आईबी अधिकारी अंकित के पिता की शिकायत पर दर्ज किया गया है। पेश गवाहों ने साफ तौर पर आरोपियों को अंकित की हत्या करते देखा है। इसके अलावा ऐसा फुटेज भी है कि मस्जिद से तीन लोग एक शव को नाले में फेंक रहे हैं। इसके अलावा इन दोनों के अलावा गिरफ्तार अन्य आरोपियों ने भी गिरफ्तारी के समय माना है कि वे अंकित की हत्या में शामिल थे।
अभियोजन पक्ष ने ये भी कहा कि ये सब निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के साथी हैं। उन्होंने कहा समीर घटना के बाद फरार हो गया था। उसे बाद में गिरफ्तार किया जा सका। कई अन्य आरोपियों को भगौड़ा घोषित किया गया है। यदि इन आरोपियों को जमानत प्रदान की गई तो वे फरार होने के अलावा गवाहों को भी प्रभावित कर सकते है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने अपने फैसले में आरोपी समीर व कासिम के इस तर्क को खारिज कर दिया कि उन्हें मामले में फर्जी फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। अदालत ने कहा कि दंगों में आईबी के युवा अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी। अदालत ने कहा कि चश्मदीद तीन गवाहों के बयानों में आरोपियों की दंगों में भूमिका स्पष्ट है। अदालत ने कहा कि जहां तक सीसीटीवी फुटेज की बात है दंगों के दौरान भीड़ ने उसे तोड़ दिया।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि मामले में आरोपपत्र दायर हो चुका है और ट्रायल चल रहा है। ऐेसे में आरोपी अपना पक्ष ट्रायल कोर्ट के समक्ष रख सकते हैं। वर्तमान में वे जमानत के हकदार नहीं है।
विज्ञापन
वहीं आरोपियों के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किलों को फर्जी मामले में फंसाया गया है और न तो उनके खिलाफ कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य है न ही कोई गवाह। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है जिसमें उनके मुवक्किल दिखाई दे रहे हो। चश्मदीद गवाहों ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयानों में उनके मुवक्किलों के खिलाफ कुछ नहीं कहा। ऐसे में जमानत स्वीकार की जाए।
वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह मामला आईबी अधिकारी अंकित के पिता की शिकायत पर दर्ज किया गया है। पेश गवाहों ने साफ तौर पर आरोपियों को अंकित की हत्या करते देखा है। इसके अलावा ऐसा फुटेज भी है कि मस्जिद से तीन लोग एक शव को नाले में फेंक रहे हैं। इसके अलावा इन दोनों के अलावा गिरफ्तार अन्य आरोपियों ने भी गिरफ्तारी के समय माना है कि वे अंकित की हत्या में शामिल थे।
अभियोजन पक्ष ने ये भी कहा कि ये सब निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के साथी हैं। उन्होंने कहा समीर घटना के बाद फरार हो गया था। उसे बाद में गिरफ्तार किया जा सका। कई अन्य आरोपियों को भगौड़ा घोषित किया गया है। यदि इन आरोपियों को जमानत प्रदान की गई तो वे फरार होने के अलावा गवाहों को भी प्रभावित कर सकते है।