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केंद्र को पीएमजीकेवाई के मुद्दे पर दायर याचिका को बतौर ज्ञापन विचार करने का निर्देश
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने केंद्र को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत अनुदान को लेकर गरीबों की पहचान के लिए जनधन खाता होने को एकमात्र योग्यता के तौर पर नहीं देखने की मांग को लेेकर ज्ञापन के रूप में विचार करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने वित्त मंत्रालय या संबंधित प्राधिकरण को याचिका को आवेदन की तरह मानने और जल्द इस पर फैसला करने को कहा है। अदालत ने इसी के साथ आकाश गोयल की याचिका का निपटारा कर दिया।
याची ने तर्क रखा कि पीएमजीकेवाई के तहत 500 रुपये अनुदान पाने के लिए प्रधानमंत्री जनधन योजना खाता होने की शर्त से कई लोग योजना के लाभ से वंचित रह गए। गोयल की ओर से पेश अधिवक्ता अजित शर्मा ने पीठ से कहा कि पीएमजीकेवाई अच्छी योजना है, लेकिन आर्थिक रूप से पिछड़े जिन लोगों के पास जनधन खाता नहीं है, उन्हें इससे बाहर रखा गया है।
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उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि कल्याणकारी योजनाओं को लेकर गरीब व्यक्तियों की पहचान के लिए पीएमजीकेवाई का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसलिए 2014 में इस योजना की घोषणा के समय जिन लोगों के पहले से खाते थे वे पीएमजीकेवाई खाता खोलने के लिए अयोग्य हैं।
याचिका में कहा गया कि इस वजह से 2020 में वित्त मंत्री की घोषणा के समय, कई गरीब महिलाएं नकदी हस्तांतरण समेत कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह गईं क्योंकि यह रकम उन्हीं महिलाओं के खाते में स्थानांतरित की जाने वाली थी जिनके पास पीएमजीकेवाई का सक्रिय खाता है।
गोयल ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि चूंकि सरकार गरीबों या जरूरतमंदों के खाते में सीधे राशि का हस्तांतरण करती है इसलिए पीएमजीकेवाई खाता खोलने या इसमें बदलने की जरूरत है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने वित्त मंत्रालय या संबंधित प्राधिकरण को याचिका को आवेदन की तरह मानने और जल्द इस पर फैसला करने को कहा है। अदालत ने इसी के साथ आकाश गोयल की याचिका का निपटारा कर दिया।
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याची ने तर्क रखा कि पीएमजीकेवाई के तहत 500 रुपये अनुदान पाने के लिए प्रधानमंत्री जनधन योजना खाता होने की शर्त से कई लोग योजना के लाभ से वंचित रह गए। गोयल की ओर से पेश अधिवक्ता अजित शर्मा ने पीठ से कहा कि पीएमजीकेवाई अच्छी योजना है, लेकिन आर्थिक रूप से पिछड़े जिन लोगों के पास जनधन खाता नहीं है, उन्हें इससे बाहर रखा गया है।
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उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि कल्याणकारी योजनाओं को लेकर गरीब व्यक्तियों की पहचान के लिए पीएमजीकेवाई का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसलिए 2014 में इस योजना की घोषणा के समय जिन लोगों के पहले से खाते थे वे पीएमजीकेवाई खाता खोलने के लिए अयोग्य हैं।
याचिका में कहा गया कि इस वजह से 2020 में वित्त मंत्री की घोषणा के समय, कई गरीब महिलाएं नकदी हस्तांतरण समेत कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह गईं क्योंकि यह रकम उन्हीं महिलाओं के खाते में स्थानांतरित की जाने वाली थी जिनके पास पीएमजीकेवाई का सक्रिय खाता है।
गोयल ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि चूंकि सरकार गरीबों या जरूरतमंदों के खाते में सीधे राशि का हस्तांतरण करती है इसलिए पीएमजीकेवाई खाता खोलने या इसमें बदलने की जरूरत है।