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दुर्लभ रोगों के इलाज के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को शीघ्र अंतिम रूप दें : हाईकोर्ट

Wed, 24 Mar 2021 12:14 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 24 Mar 2021 12:14 AM IST
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High court asks center to finalise the nation health policy for treatment of rare diseases
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को 31 मार्च तक अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है ताकि दुर्लभ रोग से पीड़ित मरीजों को समुचित इलाज उपलब्ध हो सके। इतना ही नहीं अदालत ने इस मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एक समिति बनाने और इन बीमारियों से पीड़ितों के इलाज के लिए अलग से एक कोष भी बनाने का निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि इस तरह की बीमारियों पर अनुसंधान, उसके विकास और चिकित्सा विज्ञान (एनसीआरडीटी) के लिए एक राष्ट्रीय संघ की स्थापना करें। इसके अलावा आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 में दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए बजट बढ़ाने पर भी विचार करें।
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अदालत ने सरकार को 19 अप्रैल को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह निर्देश दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया है।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय संघ में जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) अन्य संबंधित मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाए।
उन्होंने यह निर्देश स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के दाखिल किए गए हलफनामे और कोर्ट द्वारा गठित की गई विशेषज्ञों की कमेटी की रिपोर्ट पर विचार के बाद दिया। साथ ही कहा कि उक्त सभी निर्देश इससे जुड़ी नीति का हिस्सा बनेंगे। दुर्लभ बीमारियों के आवेदनों की जांच के लिए एम्स में दुर्लभ रोग समिति का गठन किया जाएगा और दुर्लभ बीमारियों के उपचार और खर्च की सिफारिश की जाएगी।
अदालत ने कहा कि निर्धारित संस्थानों से एम्स को आवेदन मिलने के चार सप्ताह के अंदर समिति द्वारा उपचार एवं खर्च पर निर्णय लिया जाए। इसके अलावा बीते तीन साल में दुर्लभ बीमारियों के लिए आवंटित किए गए अव्यवस्थित बजट को तत्काल कोष में स्थानांतरित किया जाए। अब इसका प्रबंधन, देखरेख और उपयोग नोडल एजेंसी समिति करेगी।
अदालत ने कहा कि क्राउड फंडिंग के लिए नीति के तहत सृजित किए गए डिजिटल प्लेटफार्म दुर्लभ बीमारियों के कोष से जुड़े होंगे और जो भी व्यक्ति या कंपनियां इसमें योगदान करना चाहेंगी, वे इसमें प्रत्यक्ष रूप से योगदान कर सकेंगी।

इससे पहले अदालत ने विभिन्न पहलुओं पर समाधान का आकलन करने और खोजने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। कहा था कि समिति भारत में उपचारों के विकास को स्वदेशी बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी चर्चा करेगी और इसके लिए आवश्यक समयसीमा का पालन करेगी।
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