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दिल्ली : गीले-सूखे कचरे को अलग-अलग करने में आधी आबादी फिसड्डी
Tue, 15 Feb 2022 06:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Tue, 15 Feb 2022 06:18 AM IST
सार
अधिकतर घरों में एक ही जगह पर कचरा एकत्र किया जाता है जबकि दिल्ली के नगर निगमों ने लाखों रुपया गीले-सूखे कूड़े को अलग-अलग करके रखने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाने पर खर्च कर दिया है।
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- फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
तमाम कोशिशों के बावजूद आधी से ज्यादा आबादी अभी नहीं सीख पाई कि गीले-सूखे कूड़े को अलग-अलग रखना है। सच्चाई ये है कि अधिकतर घरों में एक ही जगह पर कचरा एकत्र किया जाता है जबकि दिल्ली के नगर निगमों ने लाखों रुपया गीले-सूखे कूड़े को अलग-अलग करके रखने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाने पर खर्च कर दिया है।
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घर में ही कचरे का समुचित निस्तारण हो, इसके लिए दक्षिणी निगम ने सभी क्षेत्र उपायुक्तों को जमीन पर उतार दिया है। क्योंकि बैनर पोस्टर के प्रचार प्रसार से लोगों की समझ में नहीं आ रहा कि उन्हें कचरे को अलग करके देना है। सुबह कचरा उठाने वाली गाड़ियां जब कॉलोनी में आती हैं, तो जन जागरूकता की कलई खुल जाती है। लोगों को अब सीधा संवाद के माध्यम से समझाने के लिए निगम के स्वच्छता सहायकों, कर्मियों के साथ उपायुक्त आरडब्ल्यूए और महिला संगठनों के साथ बैठक शुरू की है और कचरे के निस्तारण के लिए निगम द्वारा किए जा रहे नवीन प्रयोगों से सबको रूबरू करा रहे हैं।
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दक्षिणी जोन की डीसी अंकिता चक्रवर्ती ने आया नगर में आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों के साथ ऐसी ही एक बैठक की, इसमें स्थानीय एनजीओ पंख के कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। यहां लोगों ने तय किया कि अपने क्षेत्र में वो यह सुनिश्चित करेंगे कि लोग कूड़ा गाड़ी के पास गीले-सूखे कचरे वाले दो कूड़ेदान लेकर आएं। पश्चिमी क्षेत्र में भी इस प्रकार की बैठक की गई है। निगम से मिली जानकारी के अनुसार इस जन जागरूकता कार्यक्रम में सिविल इंजीनियरिंग, हॉर्टिकल्चर, सिक्योरिटी, मेडिकल सर्विसेज, इलेक्ट्रिसिटी और कमर्शल डिपार्टमेंट जैसे विभागों को शामिल किया गया है, जिनका जनता से सीधा वास्ता पड़ता है।
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आसान है गीला-सूखा कचरा अलग करना
निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ियों में तीन रंग के खाने बने होते हैं। हरा कूड़ेदान किचन वेस्ट के लिए है, जिसमें सब्जियों के छिल्के, खराब हो चुका खाना, छनी हुई चायपत्ती और बाकी कंपोस्ट खाद बनने लायक पदार्थ डालना होता है। नीला सूखा कूड़े के लिए है, इसमें प्लास्टिक बैग, प्लास्टिक कवर, दूध की खाली थैली, पिज्जा बॉक्स पेपर, मेटल और जार इत्यादि डालना होता है। काला बायो मेडिकल वेस्ट, सैनिटरी नैपकिन, डायपर, कंडोम और एक्सपायरी दवाइयां डालने के लिए होता है। लेकिन अधिकर लोग एक अभी भी मिला-जुला कूड़ा एक साथ कूड़ा गाड़ी के बड़े ट्राले में ही डाल रहे हैं, लोगों की इस आदत को बदलना है।
लोग साथ देंगे तो आसान होगा कचरा निस्तारण
दक्षिणी निगम के महापौर मुकेश सूर्यान ने कहा कि लोग सहयोग करेंगे तो निगम के लिए कचरे का निस्तारण आसान हो जाएगा। लोग गीला-सूखा कूड़ा कचरा अलग करके देने लगेंगे तो इसे छंटनी करने में लगने वाला समय घट जाएगा।