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गूगल ने दिल्ली पुलिस से कोर्ट से अनुरोध पत्र लाने को कहा

Thu, 17 Jun 2021 12:04 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jun 2021 12:04 AM IST
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Google asks Delhi Police to bring LR from the Court
नई दिल्ली। देश में अगर धीमी जांच का उदाहरण दिया जाएगा तो जेएनयू हिंसा मामले में जांच का नाम सबसे पहले आएगा। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने इस मामले में डेढ़ वर्ष बाद भी अभी तक एक भी गिरफ्तारी नहीं की है और न ही अभी तक आरोपपत्र दाखिल किया है। दूसरी तरफ गूगल ने दिल्ली पुलिस को दो व्हाट्सएप ग्रुप की जानकारी साझा करने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
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गूगल ने दिल्ली पुलिस से कोर्ट से अनुरोध पत्र (लैटर रोगेट्री) लाने को कहा है। गूगल ने अदालत की तरफ से म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (एमएलएटी) के तहत अनुरोध पत्र की मांग की है। हालांकि गूगल ने ये जवाब जेएनयू हिंसा के कुछ महीने बाद ही दिल्ली पुलिस को दे दिया था। दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी केस की जानकारी मांगने पर गूगल हमेशा अनुरोध पत्र मांगने का जवाब देता है।
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने व्हाट्सएप व गूूगल को पत्र लिखकर दो व्हाट्सएप ग्रुप यूनिटी अगेनस्ट लेफ्ट और फ्रेंड्स ऑफ आरएसएस के 33 सदस्यों और छात्रों की तरफ से शेयर किए गए मैसेज, फोटोज व वीडियोज की जानकारी मांगी थी। पुलिस ने गूगल के साथ दो व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्य छात्रों के ई-मेल आईडी शेयर किए थे।
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अपराध शाखा के जांच अधिकारियों को छात्रों से पूछताछ के दौरान उनके फोन में कोई व्हाट्सएप ग्रुप नहीं मिला था। ऐसा लग रहा है कि छात्रों ने ग्रुप व चैट हटा दी थी। पुलिस अधिकारियों का मानना था कि गूगल व्हाट्सएप मैसेज का बैकअप भेज देगा और जांच में सहायता मिलेगी। दिल्ली पुलिस ने जनवरी, 20 को नौ संदिग्धों के नाम जारी किए थे। व्हाट्सएप ने दिल्ली पुलिस की मांग को खारिज कर दिया है।

गूगल का कहना है कि दिल्ली पुलिस की ओर से मांगी गई जानकारी गूगल एलएलसी की सेवाओं के तहत आती है और कंपनी अमेरिका में अमेरिकी कानून के अधीन काम करती है। गूगल ने कहा कि डाटा को सुरक्षित रखा हुआ है। दरअसल लैटर रॉगेट्री एक औपचारिक अनुरोध पत्र होता है, जो किसी अन्य देश में न्यायिक सहायता के लिए वहां की कोर्ट को भेजा जाता है। वहीं एमएलएटी दो या उससे ज्यादा देशों के बीच एक समझौता है।
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