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Delhi News: अच्छी सोच, सही भोजन और सक्रिय शरीर से बढ़ सकती है बुजुर्गों की उम्र
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया गया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 4096 बुजुर्गों के आंकड़ों का किया अध्ययन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बुजुर्गों की लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए केवल बीमारी का इलाज ही नहीं, बल्कि उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता भी बेहद महत्वपूर्ण है। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि जिन बुजुर्गों की सोचने-समझने की क्षमता अच्छी होती है, जिन्हें सही पोषण मिलता है और जो शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं, उनमें मौत का खतरा कम होता है। यह अध्ययन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया गया। शोध के नतीजे चिकित्सा पत्रिका द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने देश के 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 4096 बुजुर्गों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इनमें से अध्ययन की अवधि पूरी होने तक 951 लोगों की मौत हो गई थी। अध्ययन में बुजुर्गों की आंतरिक क्षमता का आकलन किया गया। इसमें सोचने-समझने की क्षमता, मानसिक स्थिति, पोषण, चलने-फिरने की क्षमता, देखने और सुनने की शक्ति जैसे पहलुओं को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि जिन बुजुर्गों की आंतरिक क्षमता बेहतर थी, उनमें मृत्यु का खतरा कम था। वहीं, जिन लोगों में शारीरिक या मानसिक कमजोरी अधिक थी, उनमें मौत का जोखिम लगातार बढ़ता गया।
कमजोरी मिली, तो मौत का खतरा 48 प्रतिशत बढ़ा
एम्स दिल्ली और राष्ट्रीय वृद्धावस्था केंद्र के वृद्धावस्था चिकित्सा विभाग के डॉ. अभिजीत राजाराम राव के अनुसार, यदि किसी बुजुर्गों में एक कमजोरी पाई गई तो मौत का खतरा लगभग 48 प्रतिशत बढ़ गया। दो कमजोरियां होने पर यह खतरा 110 प्रतिशत तक पहुंच गया। चार कमजोरियां होने पर जोखिम 215 प्रतिशत तक बढ़ गया। उन्होंने कहा कि अच्छी सोचने-समझने की क्षमता, संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि बुजुर्गों के लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित हुई। उनका कहना है कि भारत जैसे देशों में जहां बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और स्वास्थ्य संसाधन सीमित हैं, वहां इस तरह की जांच से कमजोर लोगों की समय रहते पहचान की जा सकती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि भविष्य में बुजुर्गों की देखभाल की योजनाओं में केवल बीमारी के इलाज पर नहीं, बल्कि उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता को मजबूत बनाने पर भी बराबर ध्यान देना होगा।
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शोधकर्ताओं ने 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 4096 बुजुर्गों के आंकड़ों का किया अध्ययन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बुजुर्गों की लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए केवल बीमारी का इलाज ही नहीं, बल्कि उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता भी बेहद महत्वपूर्ण है। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि जिन बुजुर्गों की सोचने-समझने की क्षमता अच्छी होती है, जिन्हें सही पोषण मिलता है और जो शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं, उनमें मौत का खतरा कम होता है। यह अध्ययन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया गया। शोध के नतीजे चिकित्सा पत्रिका द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने देश के 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 4096 बुजुर्गों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इनमें से अध्ययन की अवधि पूरी होने तक 951 लोगों की मौत हो गई थी। अध्ययन में बुजुर्गों की आंतरिक क्षमता का आकलन किया गया। इसमें सोचने-समझने की क्षमता, मानसिक स्थिति, पोषण, चलने-फिरने की क्षमता, देखने और सुनने की शक्ति जैसे पहलुओं को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि जिन बुजुर्गों की आंतरिक क्षमता बेहतर थी, उनमें मृत्यु का खतरा कम था। वहीं, जिन लोगों में शारीरिक या मानसिक कमजोरी अधिक थी, उनमें मौत का जोखिम लगातार बढ़ता गया।
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कमजोरी मिली, तो मौत का खतरा 48 प्रतिशत बढ़ा
एम्स दिल्ली और राष्ट्रीय वृद्धावस्था केंद्र के वृद्धावस्था चिकित्सा विभाग के डॉ. अभिजीत राजाराम राव के अनुसार, यदि किसी बुजुर्गों में एक कमजोरी पाई गई तो मौत का खतरा लगभग 48 प्रतिशत बढ़ गया। दो कमजोरियां होने पर यह खतरा 110 प्रतिशत तक पहुंच गया। चार कमजोरियां होने पर जोखिम 215 प्रतिशत तक बढ़ गया। उन्होंने कहा कि अच्छी सोचने-समझने की क्षमता, संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि बुजुर्गों के लिए सबसे महत्वपूर्ण साबित हुई। उनका कहना है कि भारत जैसे देशों में जहां बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और स्वास्थ्य संसाधन सीमित हैं, वहां इस तरह की जांच से कमजोर लोगों की समय रहते पहचान की जा सकती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि भविष्य में बुजुर्गों की देखभाल की योजनाओं में केवल बीमारी के इलाज पर नहीं, बल्कि उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता को मजबूत बनाने पर भी बराबर ध्यान देना होगा।
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