आम बजट 2022: दिल्ली मेट्रो को उम्मीदें- दायरा बढ़कर होगा 400 किलोमीटर से अधिक, बढ़ेगी रफ्तार
रिठाला-बवाना-नरेला के बीच मेट्रोलाइट चलाने की योजना है ताकि सुदूर क्षेत्रों में भी यात्रियों को एक उत्कृष्ट सार्वजनिक परिवहन का विकल्प उपलब्ध हो। इस कॉरिडोर पर मेट्रोलाइट की शुरुआत से मेट्रो का नेटवर्क 400 किलोमीटर से अधिक हो जाएगा।
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बजट से दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन को नई रफ्तार मिलने की काफी उम्मीद हैं। कोरोना महामारी काल में विपरीत हालात में भी दिल्ली मेट्रो ने कई परियोजनाओं को सिरे चढ़ाया। बजट में सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के प्रावधानों से मेट्रो फेज-4 परियोजना के लिए मेट्रो की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।
रिठाला-बवाना-नरेला के बीच मेट्रोलाइट चलाने की योजना है ताकि सुदूर क्षेत्रों में भी यात्रियों को एक उत्कृष्ट सार्वजनिक परिवहन का विकल्प उपलब्ध हो। इस कॉरिडोर पर मेट्रोलाइट की शुरुआत से मेट्रो का नेटवर्क 400 किलोमीटर से अधिक हो जाएगा। दिल्ली मेट्रो फेस-4 के तीन कॉरिडोर पर फिलहाल निर्माण कार्य चल रहा है। इसके तहत आरके आश्रम-जनकपुरी (पश्चिम), तुगलकाबाद-एयरोसिटी और मौजपुर-मजलिस पार्क के बीच मेट्रो कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। फेज-4 के तीन शेष कॉरिडोर में रिठाला-बवाना-नरेला के बीच मेट्रोलाइट चलाने की योजना है। इसके लिए सभी संभावनाओं को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने तैयारी भी कर ली है।
दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क में होगा विस्तार
इस बजट से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को काफी उम्मीदें हैं। देश भर की मेट्रो परियोजनाओं के लिए बजट में होने वाली घोषणा से दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क में भी विस्तार होगा। दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क 390 किलोमीटर से अधिक लंबा हो चुका है। अगली किसी भी परियोजना पर मेट्रो के विस्तार के बाद दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क 400 किलोमीटर से अधिका लंबा हो जाएगा। 22.91 किलोमीटर में मेट्रोलाइट कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इससे दिल्ली वासियों को सुदूर इलाकों से भी दिल्ली के अलग अलग क्षेत्रों में पहुंचना आसान हो जाएगा। मेट्रो फेज-4 के तीन शेष कॉरिडोर में रिठाला-बवाना-नरेला, लाजपत नगर साकेत (जी ब्लॉक) और इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ मेट्रो कॉरिडोर को केंद्र की हरी झंडी मिलने का इंतजार है।
...ऐसी होगी मेट्रोलाइट
मेट्रोलाइट एक हल्की रेल है। सड़क के साथ पटरी पर चलने वाली मेट्रोलाइट में सामान्य तौर पर तीन कोच होंगे। इसे कम यात्रियों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। मेट्रो फीडर के तौर पर चलने वाली मेट्रोलाइट से मेट्रो लाइनों तक पहुंच आसान होगी। इससे दूर दराज के क्षेत्रों में भी गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्रियों को तीव्र और सुलभ सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध होगी। मेट्रो की तुलना में मेट्रोलाइट की लागत कम होने की वजह से इस परियोजना को पूरा होने में भी कम वक्त लगेगा। सड़क के साथ साथ मेट्रोलाइट चलेगी, लेकिन दोनों तरफ ट्रैफिक प्रभावित न हो, इसलिए तारें लगाई जाएंगी। स्टेशनों पर एफसी गेट नहीं होंगे, इसलिए टिकट के लिए नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) को अपनाया जाएगा। मेट्रोलाइट के चलने से सुबह से शाम के व्यस्त ट्रैफिक में जहां 2,000-15,000 तक वाहनों की आवाजाही होती है, वहीं ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी।