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इंटरनेट से ठगी बढ़ी, अपराधी भी पहुंच से दूर
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नई दिल्ली। लॉकडाउन के दौरान साइबर क्राइम के मामलों में लगभग दोगुना उछाल आया है। वर्ष 2020 में जनवरी से मार्च के बीच साइबर क्राइम की 2000 शिकायतें आ रही थीं। मार्च में इनकी संख्या अचानक बढ़ने लगी। मई में तो आंकड़ा 4000 हजार से ऊपर चला गया। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल ठगों ने 1.65 लाख लोगों की जमापूंजी हड़प ली, जबकि इन मामलों में केवल 213 लोग ही गिरफ्तार किए जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर क्राइम की जांच में देर लगती है। कई बार अपराधी पीड़ित से हजारों किलोमीटर दूर होता है। जब तक पुलिस उस तक पहुंचती है, तब तक वह अपने छिपने का जुगाड़ कर चुका होता है। ठगों ने सरकारी से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट बनाकर सुविधाएं और सब्सिडी देने के नाम पर ठगी की। पेमेंट एप, केवाईसी, सिम अपग्रेड कराने, फिशिंग लिंक, कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर और धोखे से अश्लील वीडियो बनाकर भी ठगी की।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी नौकरी और कल्याणकारी योजनाओं का झांसा देकर 1.49 लाख से अधिक लोगों को नुकसान पहुंचाया गया। इसमें महज आठ मामले दर्ज कर 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। फर्जी कॉल सेंटर के 11 मामले दर्ज हुए, जबकि 14600 से अधिक लोगों के साथ ठगी की गई। पुलिस ने इस मामले में 138 लोगों को गिरफ्तार किया। हालांकि पुलिस आयुक्त ज्यादातर मामलों में खुद अपनी पीठ थपथपाते हुए नजर आए।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर क्राइम की जांच में देर लगती है। कई बार अपराधी पीड़ित से हजारों किलोमीटर दूर होता है। जब तक पुलिस उस तक पहुंचती है, तब तक वह अपने छिपने का जुगाड़ कर चुका होता है। ठगों ने सरकारी से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट बनाकर सुविधाएं और सब्सिडी देने के नाम पर ठगी की। पेमेंट एप, केवाईसी, सिम अपग्रेड कराने, फिशिंग लिंक, कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर और धोखे से अश्लील वीडियो बनाकर भी ठगी की।
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पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी नौकरी और कल्याणकारी योजनाओं का झांसा देकर 1.49 लाख से अधिक लोगों को नुकसान पहुंचाया गया। इसमें महज आठ मामले दर्ज कर 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। फर्जी कॉल सेंटर के 11 मामले दर्ज हुए, जबकि 14600 से अधिक लोगों के साथ ठगी की गई। पुलिस ने इस मामले में 138 लोगों को गिरफ्तार किया। हालांकि पुलिस आयुक्त ज्यादातर मामलों में खुद अपनी पीठ थपथपाते हुए नजर आए।
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