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चार हजार विचाराधीन कैदियों को मिलेगी 90 दिन की अंतरिम जमानत
Fri, 07 May 2021 05:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 07 May 2021 05:40 AM IST
सार
- कमेटी ने कहा वर्तमान स्थिति चितांजनक, जीवन के अधिकार के तहत जमानत पाने के हकदार
- जघन्य नशीले पदार्थ, दुष्कर्म, एसिड अटैक, मकोका, आतंकी गतिविधियों में लिप्त को जमानत नहीं
- जेलों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लिया निर्णय
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राजधानी की जेलो में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए जेल में बंद करीब चार विचाराधीन कैदियों को 90 दिन की अंतरिम जमानत व 60 दिन की पैरोल पर रिहा किया जाएगा। गठित कमेटी ने महामारी की वर्तमान स्थिति को चितांजनक पूर्ण बताया है। कमेटी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार भारत के प्रत्येक नागरिक का सबसे अनमोल मौलिक अधिकार है।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने बुधवार की शाम हुई बैठक में यह निर्णय लिया है। बैठक में छह श्रेणियां बनाकर जमानत व पैरोल पाने वाले कैदियों को निर्धारण किया है। इतना ही नहीं कमेटी ने स्पष्ट कर दिया कि जघन्य अपराधों में लिप्त जैसे नशीले पदार्थ, पोक्सों एक्ट, दुष्कर्म, एसिड अटैक, मकोका, आतंकी गतिविधियों में लिप्त आरोपियों को जमानत प्रदान नहीं की जाएगी। इसके अलावा विदेशी नागरिक, जिनके खिलाफ सीबीआई, ईडी व एनआईए व भ्रष्टाचार के मामले है वे भी जमानत के हकदार नहीं होंगे।
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कमेटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने डीएसएलएसए सचिव कंवल जीत अरोड़ा को निर्देश दिया कि वे इस फैसले से सभी प्रधान जिला एत्र न्यायाधीशों को अवगत करवा दे ताकि विचाराधीन कैदियों को जमानत प्रदान करने की प्रक्रिया शुरु हो सके। बैठक में शामिल न्यायमूर्ति सांघी के अलावा कंवलजीत आरोडा, जेल महानिरीक्षक संदीप गोयल व प्रधान सचिव बीएस भल्ला ने चिकित्सा व विशेषज्ञों की राय का हवाला देते हुए कहा कि कोविड की दूसरी लहर से पूरा देश घिरा हुआ है। हर किसी को सांस लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
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कमेटी ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार भारत के प्रत्येक नागरिक का सबसे अनमोल मौलिक अधिकार है। समिति ने करीब चार हजार विचाराधीन कैदियों को 90 दिन के लिए अंतरिम जमानत की सिफारिश मंजूर कर दी। दरअसल पिछले वर्ष भी करीब 3499 विचाराधीन कैदियों को जेल में भीड को देखते हुए अंतरिम जमानत प्रदान की गई थी। इस वर्ष स्थिति ठीक होने पर कमेटी ने 17 फरवरी को सभी को समर्पण का निर्देश दिया था। अब पुन: मामले बढ़ने पर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई है। कमेटी ने कहा कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार स्थिति ज्यादा खतरनाक है। इस बार पोजिटिव रेट ही नहीं बल्कि मृत्यु दर भी अधिक है।
जेल में 319 कैदी व 138 जेल स्टाफ संक्रमित
बैठक के दौरान जेल महानिरीक्षक संदीप गोयल ने बताया कि 319 कैदी संक्रमित हुए इनमें से 65 ठीक हो गए जबकि 5 की मौत हुई। 249 संक्रमित में से 63 को आइसोलट किया गया है वहीं 67 जेल अस्पताल, 37 मंडोली जेल अस्पताल, 16 बुराड़ी, 14 जीटीबी, 5 एनएनजेपी, 4 डीडीयू के अलावा एम्स व मैक्स में एक-एक कैदी भर्ती है। इसके अलावा 138 जेल स्टॉफ भी संक्रमित हुआ है। इनमें से आठ ठीक हो गए, 127 अभी संक्रमित है जिन्हें घर में आईसोलेट किया गया है। जेल में 85 प्रतिशत को वैक्सीन लगाई गई है जबकि मात्र 564 कैदियों को ही वैक्सीन दी गई है। जेल महानिरीक्षक ने बताया कि 10026 कैदियों की क्षमता वाली जेल में 19679 कैदी है।
छह श्रेणियों में मिलेगी जमानत
कमेटी ने तय किया है कि साधारण, सिविल मामलों में सात वर्ष तक की सजा के आरोप के मामलों में बंद उन कैदियों को 90 दिन की जमानत प्रदान की जाएगी जो 15 दिन या उससे ज्यादा अवधि से बंद है। इसी प्रकार 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक जिन्हें उनके मामले में 10 वर्ष तक की सजा के प्रावधान है और वे चार माह से ज्यादा अवधि से बंद है। इसी प्रकार 60 से कम आयु के उन कैदियों को जमानत मिलेगी जिनके आरोप में 10 वर्ष कैद व छहमाह से ज्यादा अवधि से बंद हे। इसके अलावा एचआईवी, कैंसर, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित जमानत पाने के हकदार होंगे।