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डीएसजीएमसी कार्यकारिणी का गठन अटका
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नई दिल्ली। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) की नई कार्यकारिणी का गठन लटकता दिख रहा है। चुने हुए सदस्यों का मामला अदालत तक पहुंचने की वजह से देरी हो रही है। कई मामले तो निचली अदालत से हाईकोर्ट तक पहुंच गए हैं। गुरुद्वारा चुनाव निदेशक के निर्णय को भी सिख नेता अदालत में चुनौती दे रहे हैं।
निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरमुखी परीक्षा में फेल वाली गुरुद्वारा चुनाव निदेशक की रिपोर्ट को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इसकी सुनवाई 8 अक्तूबर को थी, लेकिन अब 22 अक्तूबर को होनी है। अब अदालत के रुख पर ही कमेटी गठन निर्भर होगा। दिल्ली गुरुद्वारा एक्ट के अनुसार, नए कार्यकारी बोर्ड का चुनाव 25 सितंबर तक होना अनिवार्य था।
अब तक को-आप्शन की प्रक्रिया को भी पूरा नहीं किया जा सका है। गुरुद्वारा चुनाव के जानकार इंदर मोहन सिंह ने कहा कि 24 सितंबर को दोबारा को-आप्शन की मीटिंग बुलाई गई थी। इसमें चार तख्तों के जत्थेदारों को नामजद करने के बाद सिंह सभा गुरुद्वारों के प्रधानों की नामजदगी के लिए पर्चियों की लॉटरी भी निकाली गई। ऐतराज उठने पर 2 के स्थान पर 5 प्रधानों की पर्चियां निकाली गईं। यहां भी गुरुद्वारा एक्ट की अवहेलना हुई। दो हफ्ते बीतने के बाद भी नामजद सदस्यों को लेकर अधिसूचना जारी नहीं हुई। इन हालात में अंदेशा है कि नई कमेटी का गठन टल गया है।
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा एक्ट 1971 के अनुसार, प्रबंधक कमेटी में 46 वार्डों के लिए चुनाव होता है। 9 सदस्यों की नामजदगी होती है। नई कमेटी के लिए 22 अगस्त को चुनाव हुआ और नतीजा 25 अगस्त को आया था। इसके बाद चुने हुए सदस्यों का मामला गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय और अदालत में पहुंचा। इसके बाद 7 सितंबर को सिरसा के गुरमुखी ज्ञान की परीक्षा ली गई।
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निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरमुखी परीक्षा में फेल वाली गुरुद्वारा चुनाव निदेशक की रिपोर्ट को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इसकी सुनवाई 8 अक्तूबर को थी, लेकिन अब 22 अक्तूबर को होनी है। अब अदालत के रुख पर ही कमेटी गठन निर्भर होगा। दिल्ली गुरुद्वारा एक्ट के अनुसार, नए कार्यकारी बोर्ड का चुनाव 25 सितंबर तक होना अनिवार्य था।
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अब तक को-आप्शन की प्रक्रिया को भी पूरा नहीं किया जा सका है। गुरुद्वारा चुनाव के जानकार इंदर मोहन सिंह ने कहा कि 24 सितंबर को दोबारा को-आप्शन की मीटिंग बुलाई गई थी। इसमें चार तख्तों के जत्थेदारों को नामजद करने के बाद सिंह सभा गुरुद्वारों के प्रधानों की नामजदगी के लिए पर्चियों की लॉटरी भी निकाली गई। ऐतराज उठने पर 2 के स्थान पर 5 प्रधानों की पर्चियां निकाली गईं। यहां भी गुरुद्वारा एक्ट की अवहेलना हुई। दो हफ्ते बीतने के बाद भी नामजद सदस्यों को लेकर अधिसूचना जारी नहीं हुई। इन हालात में अंदेशा है कि नई कमेटी का गठन टल गया है।
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा एक्ट 1971 के अनुसार, प्रबंधक कमेटी में 46 वार्डों के लिए चुनाव होता है। 9 सदस्यों की नामजदगी होती है। नई कमेटी के लिए 22 अगस्त को चुनाव हुआ और नतीजा 25 अगस्त को आया था। इसके बाद चुने हुए सदस्यों का मामला गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय और अदालत में पहुंचा। इसके बाद 7 सितंबर को सिरसा के गुरमुखी ज्ञान की परीक्षा ली गई।