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Green Steps : उजड़ चुके पार्क का हरियाली से किया शृंगार, रंग लाई छह माह की साझा मेहनत
Sun, 12 Jun 2022 04:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा
किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 12 Jun 2022 04:54 AM IST
सार
पर्यावरणीय संतुलन पूरी तरह गड़बड़ा चुका है, लेकिन कुछ ऐसे विरले भी हैं जो धरा के आभूषण, यानी पेड़-पौधों को बचाने में जुटे हैं। नीलम गुप्ता, शशी जैन और उनकी टीम उन्हीं विरलों में से है, जो फिजा की स्वच्छता के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
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नीलम गुप्ता, शशी जैन और उनकी टीम के साथी...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देशभर में अंधाधुंध वन कटान और जल दोहन के कारण प्रकृति अपनी खूबसूरती खोती जा रही है। पर्यावरणीय संतुलन पूरी तरह गड़बड़ा चुका है, लेकिन कुछ ऐसे विरले भी हैं जो धरा के आभूषण, यानी पेड़-पौधों को बचाने में जुटे हैं। नीलम गुप्ता, शशी जैन और उनकी टीम उन्हीं विरलों में से है, जो फिजा की स्वच्छता के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
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वसुंधरा में उजड़ चुके एक पार्क का इस टीम ने नगर निगम का सहयोग लेकर हरियाली से शृंगार किया है। छह माह की साझी कोशिश के बाद अब पार्क को 4500 पौधों के साथ नया जीवन मिल गया है। वह दिन दूर नहीं, जब राजधानी को पांचवां जल पार्क मिलने जा रहा है। नीलम गुप्ता ने बताया कि उनकी सोसायटी के पीछे स्थित पार्क की हरियाली को बीते वर्ष छठ पूजा के दौरान उजाड़ दिया गया था। पूजा के लिए यहां बड़े-बड़े गड्ढे किए गए और बाद में हरियाली को लेकर कोई काम नहीं किया गया। अब पार्क में अक्सर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता था। दल्लुपुरा गांव के लोग यहां अपने पशुओं को भी बांध देते थे।
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इसको देखते हुए नीलम गुप्ता ने आसपास की तीन सोसायटी में कुछ लोगों को जोड़ा और शशी जैन के साथ पार्क की सूरत बदलने के लिए ठानी।
मियावाकी पद्धति से किया जा रहा काम : नीलम गुप्ता ने बताया कि पार्क की दशा सुधारने के लिए निगम के अधिकारियों को पत्र लिखा गया। इस बीच अधिकारियों की ओर से आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन नीलम गुप्ता ने हार नहीं मानी और लगातार अधिकारियों से संपर्क करती रहीं।
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इस बीच निगम ने सोसायटी के लोगों को जंगल वन के बारे में बताया। यह विचार सोसायटी के लोगों को पसंद आया, जिसके बाद निगम ने पार्क को दोबारा विकसित करने के लिए काम शुरू कर दिया। इसके लिए एक संस्था ग्रीन यात्रा से संपर्क किया गया, जो दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर चार जंगल वन विकसित कर चुकी थी।
संस्था के माध्यम से निगम ने पार्क से मलबा हटाने के साथ पौधों के लिए खुदाई कराई। संस्था की ओर से पार्क के लिए काम कर रहे राज ने बताया कि यहां 40 से अधिक प्रजातियों के पौधे रोपे गए। खास बात यह है कि पार्क को मियावाकी पद्धति से विकसित किया जा रहा है। यह एक जापानी वनीकरण विधि है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं।
जीवामृत से मिल रहा पोषण
वनों के लिए काम कर रहे राज के मुताबिक, पौधों को पोषण देने के लिए देशी रूप से जीवामृत तैयार किया गया है। इसके तहत बेसन, गुड़, सरसों का तेल व जड़ के तेल मिलाकर जीवामृत तैयार किया गया है। जीवामृत को 10 लीटर पानी में एक लीटर की मात्रा में मिलाया जाता है, जिसके बाद इसे पौधों के जड़ों में डाला जाता है।
ताजी हवा और फल मिलेंगे
पार्क में 40 से अधिक प्रजातियों के पौधों को रोपा गया है। खास बात यह है कि पौधरोपण में देशी प्रजातियों को ही शामिल किया गया है। जंगल पार्क को लेकर काम कर रहे राज का कहना है कि इन पौधों को पूरी तरह से बढ़ने में तीन साल का समय लगेगा। इसके बाद यहां समय के साथ-साथ घना जंगल विकसित हो जाएगा।