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प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह पंचतत्व में विलीन, पुत्र विजय कुमार ने दी मुखाग्नि
Wed, 20 Feb 2019 09:41 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 20 Feb 2019 09:41 PM IST
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नामवर सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
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हिंदी के प्रख्यात आलोचक एवं साहित्यकार डॉ. नामवर सिंह बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका अंतिम संस्कार नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित दयानंद घाट मुक्तिधाम में शाम करीब 5 बजे हुआ। उनके पुत्र विजय कुमार ने उन्हें मुखाग्नि दी। 93 वर्षीय डॉ. नामवर सिंह ने मंगलवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर अंतिम सांस ली थी।
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28 जुलाई, 1926 को यूपी के चंदौली जिले के जीयनपुर गांव में पैदा हुए नामवर सिंह हिंदी साहित्य के बड़े रचनाकार हजारी प्रसाद द्विवेदी के शिष्य थे। उनकी गिनती हिंदी साहित्य जगत के बड़े समालोचकों में थी। करीब एक माह से उनका उपचार एम्स के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा था। ब्रेन हैमरेज के बाद घर में फर्श पर गिरने के कारण उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। मंगलवार शाम से उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी।
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बुधवार को चितरंजन पार्क स्थित उनके निवास पर साहित्य, राजनीति एवं पत्रकारिता जगत के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके अंतिम संस्कार में हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि डॉ. नामवर ऐसे वृक्ष के समान थे, जिनसे पूरे साहित्य जगत को प्राणवायु मिलती थी। इनके अलावा अशोक वाजपेयी, अशोक चक्रधर, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय एवं सदस्य सचिव सच्चिदानंद, जेएनयू के प्रोफेसर अब्दुल बिस्मिल्लाह सहित साहित्य एवं पत्रकारिता जगत के लोगों ने भी श्रद्धांजलि दी।
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हिंदी साहित्य में नए प्रतिमान स्थापित करने वाले शीर्षस्थ समालोचक डॉ. नामवर सिंह के निधन से गहरा दुख हुआ। उनका जाना केवल हिंदी ही नहीं, अपितु सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य के लिए बहुत बड़ा आघात है। शोकाकुल परिवार व सम्पूर्ण हिंदी जगत के प्रति मेरी संवेदनाएं। -रामनाथ कोविंद, राष्ट्रपति
हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष नामवर सिंह के निधन से गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने आलोचना के जरिये हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी। ‘दूसरी परंपरा की खोज’ करने वाले नामवर जी का जाना साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे और परिजनों को संबल। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
नामवर सिंह के निधन से भारतीय भाषाओं ने अपनी एक ताकतवर आवाज खो दी है। समाज को सहिष्णु, जनतांत्रिक बनाने में उन्होंने जिंदगी लगा दी। हिंदुस्तान में संवाद को बहाल करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। -राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष
डॉ. नामवर सिंह के निधन से गहरा दुख पहुंचा। अपनी विविध रचनाओं के माध्यम से उन्होंने साहित्य जगत को समृद्ध किया। उनका निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और शोक संतप्त परिवार को धैर्य प्रदान करे। -योगी आदित्यनाथ, यूपी के मुख्यमंत्री
समय से आगे की दृष्टि
नामवर सिंह ने कभी कहा था कि उन्हें किसी निबंध या पुस्तक का प्रकाशन तभी जरूरी लगता है, जबकि वह मौजूदा परिदृश्य में हस्तक्षेप करे, उसके ठहराव को तोड़े और वाद-विवाद-संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए। यानी समकालीन परिदृश्य उनका प्रिय विषय रहा। इस पृष्ठभूमि में यह बेहद दिलचस्प है कि नामवर के आलोचना साहित्य को प्रकाशित हुए कई दशक बीतने के बावजूद उनकी कई स्थापनाएं ऐसी हैं, जिनमें आज भी नयापन है और भावी आलोचकों के लिए प्रेरक हैं। नामवर सिंह ने अपने वरिष्ठ आलोचकों की तुलना में कम लिखा, पर गुणवत्ता की दृष्टि से वे महान कृतियां करार दी गईं।