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डूसू चुनाव : एबीवीपी ने गिनाई अपनी उपलब्धियां
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव को लेकर प्रेस वार्ता करते अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के
- फोटो : Ashram
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डूसू चुनाव : एबीवीपी ने गिनाई अपनी उपलब्धियां
नई दिल्ली। दिल्ली विवि छात्रसंघ चुनाव का बिगुल बजते ही छात्र संगठनों ने अपनी उपलब्धियों का बखान शुरू कर दिया है। एबीवीपी ने मंगलवार को एक साल में डूसू में किए गए कार्यों की जानकारी दी। संगठन के पदाधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने पिछले वादों को पूरा किया है और इस बार स्टूडेंट फ्रेंडली डूसू छात्रों को देने जा रहे हैं। अब एबीवीपी का जोर दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म व अन्य कॉलेजों को डूसू से जोड़ने का रहेगा। वर्तमान में डूसू से 51 कॉलेज जुड़े हुए हैं, जिन्हें वोट देने का अधिकार है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने अपनी उपलब्धियों को बताने के लिए मंगलवार को प्रेस वार्ता की। इस मौके पर राष्ट्रीय मीडिया संयोजक मोनिका चौधरी ने कहा कि बीते साल 50 फीसदी बजट महिलाओं के लिए रखने की बात कही थी। उसके अंतर्गत मिशन साहसी कार्यक्रम में कॉलेजों में सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम चलाया। स्वयंसिद्धा कार्यक्रम आयोजित किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अपने सुझाव भी सरकार को दिए हैं। फीस बढ़ोतरी को लेकर भी एबीवीपी ने आवाज बुलंद की।
एबीवीपी प्रदेश मंत्री सिद्घार्थ यादव ने कहा कि यू स्पेशल बसों में मार्शलों की तैनाती की मांगों को पूरा कराया है। नेत्रहीन छात्रों के लिए टेक्सटाइल पथ का निर्माण, डूसू ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को छात्रवृत्ति देने का एलान, पुस्तकालयों को 24 घंटे खोलने की मांग की गई, जिसकी शुरुआत हो गई है। नए हॉस्टल की मांग की गई। पिछली बार हमने एक जिम्मेदार डूसू देने की बात कही थी, जो कि कर दिखाया और इस बार स्टूडेंट फ्रैंडली डूसू देने को लेकर छात्रों के बीच जा रहे हैं। पूर्व डूसू अध्यक्ष शक्ति सिंह ने कहा कि स्पोर्ट्स व हॉस्टल के मुद्दे उठाए। हॉस्टल के मुद्दे को यूपी सरकार के सामने रखा, जहां से उन्हें 48 करोड़ रुपये का फंड प्राप्त हुआ।
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वहीं, छात्रसंघ चुनाव से वर्तमान में 51 कॉलेज जुड़े हैं, जिनके छात्रों को वोट देने का अधिकार मिलता है। दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म, डीएसजे व कुछ अन्य कॉलेजों के छात्रों को वोट का अधिकार नहीं है। एबीवीपी प्रदेश मंत्री ने कहा कि इन कॉलेजों को जोड़ने के लिए भी काम करेंगे। केशव महाविद्यालय के विद्यार्थियों को भी वोट देने का अधिकार नहीं था, लेकिन वह भी डूसू से जुड़ा। इस मौके पर सहसचिव ज्योति चौधरी भी मौजूद थीं।
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नई दिल्ली। दिल्ली विवि छात्रसंघ चुनाव का बिगुल बजते ही छात्र संगठनों ने अपनी उपलब्धियों का बखान शुरू कर दिया है। एबीवीपी ने मंगलवार को एक साल में डूसू में किए गए कार्यों की जानकारी दी। संगठन के पदाधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने पिछले वादों को पूरा किया है और इस बार स्टूडेंट फ्रेंडली डूसू छात्रों को देने जा रहे हैं। अब एबीवीपी का जोर दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म व अन्य कॉलेजों को डूसू से जोड़ने का रहेगा। वर्तमान में डूसू से 51 कॉलेज जुड़े हुए हैं, जिन्हें वोट देने का अधिकार है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने अपनी उपलब्धियों को बताने के लिए मंगलवार को प्रेस वार्ता की। इस मौके पर राष्ट्रीय मीडिया संयोजक मोनिका चौधरी ने कहा कि बीते साल 50 फीसदी बजट महिलाओं के लिए रखने की बात कही थी। उसके अंतर्गत मिशन साहसी कार्यक्रम में कॉलेजों में सेल्फ डिफेंस कार्यक्रम चलाया। स्वयंसिद्धा कार्यक्रम आयोजित किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अपने सुझाव भी सरकार को दिए हैं। फीस बढ़ोतरी को लेकर भी एबीवीपी ने आवाज बुलंद की।
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एबीवीपी प्रदेश मंत्री सिद्घार्थ यादव ने कहा कि यू स्पेशल बसों में मार्शलों की तैनाती की मांगों को पूरा कराया है। नेत्रहीन छात्रों के लिए टेक्सटाइल पथ का निर्माण, डूसू ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को छात्रवृत्ति देने का एलान, पुस्तकालयों को 24 घंटे खोलने की मांग की गई, जिसकी शुरुआत हो गई है। नए हॉस्टल की मांग की गई। पिछली बार हमने एक जिम्मेदार डूसू देने की बात कही थी, जो कि कर दिखाया और इस बार स्टूडेंट फ्रैंडली डूसू देने को लेकर छात्रों के बीच जा रहे हैं। पूर्व डूसू अध्यक्ष शक्ति सिंह ने कहा कि स्पोर्ट्स व हॉस्टल के मुद्दे उठाए। हॉस्टल के मुद्दे को यूपी सरकार के सामने रखा, जहां से उन्हें 48 करोड़ रुपये का फंड प्राप्त हुआ।
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वहीं, छात्रसंघ चुनाव से वर्तमान में 51 कॉलेज जुड़े हैं, जिनके छात्रों को वोट देने का अधिकार मिलता है। दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म, डीएसजे व कुछ अन्य कॉलेजों के छात्रों को वोट का अधिकार नहीं है। एबीवीपी प्रदेश मंत्री ने कहा कि इन कॉलेजों को जोड़ने के लिए भी काम करेंगे। केशव महाविद्यालय के विद्यार्थियों को भी वोट देने का अधिकार नहीं था, लेकिन वह भी डूसू से जुड़ा। इस मौके पर सहसचिव ज्योति चौधरी भी मौजूद थीं।