तकनीकी तौर पर खामी के चलते दूसरे दिन दिल्ली में कम लगा टीका, 3111 स्वास्थ्य कर्मचारियों का ही हुआ टीकाकरण
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कोरोना टीकाकरण को लेकर सोमवार को दिल्ली में तकनीकी तौर पर खामियां देखने को मिली हैं। जिन स्वास्थ्य कर्मचारियों ने पहले दिन टीका लेने से इनकार कर दिया था दूसरे दिन इन्हीं के पास कोविन एप के जरिए मैसेज पहुंचा। इनमें से ज्यादातर कर्मचारियों ने टीकाकरण में दिलचस्पी नहीं दिखाई जिसका परिणाम यह रहा कि दिल्ली में पहले की अपेक्षा दूसरे दिन कम कर्मचारियों को टीका लग पाया है। दिल्ली के कई बड़े सरकारी केंद्रों पर टीकाकरण सुस्त देखने को मिला। जबकि निजी अस्पतालों में तेज गति से स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाया जा रहा है।
दिल्ली में सबसे बड़ा केंद्र लोकनायक अस्पताल है। यहां पहले दिन 32 लोगों को टीका लगा लेकिन सोमवार को केवल 12 स्वास्थ्य कर्मचारियों को ही टीका लग सका। आंकड़ों के ही मुताबिक दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सोमवार को केवल 20 स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगा है। जबकि पहले दिन यहां 45 कर्मचारियों को टीका लगा था।
जीटीबी अस्पताल की बात करें तो पहले दिन यहां 31 और अब 24 कर्मचारियों को टीका लगा। आरएमएल अस्पताल की बात करें तो यहां 69 लोगों को टीका लगा है। जबकि पहले दिन केवल 31 कर्मचारियों को टीका लगा था। ठीक इसी तरह आकाश अस्पताल में पहले दिन 47 और दूसरे दिन 57 लोगों को डोज मिली।
अपोलो अस्पताल में पहले दिन पहले दिन 72 और अब 73 कर्मचारियों को टीका लगा। इसके अलावा सफदरजंग अस्पताल में 16 जनवरी को 72 स्वास्थ्य कर्मचारी टीका के लिए आगे आए थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बीते शनिवार को दिल्ली में 4319 लोगों को टीका लगा था लेकिन सोमवार को 3111 स्वास्थ्य कर्मचारियों को ही टीका लग पाया है।
जानकारी मिली है कि को-विन एप में तकनीकी खामियों के चलते टीकाकरण में समस्या आई। स्वास्थ्य कर्मचारियों की जानकारी सही समय पर अपलोड नहीं हो पा रही थी। एप में गड़बड़ी के चलते लोक नायक अस्पताल में टीका लगवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के पास कोई एसएमएस नहीं पहुंचा। इसके कारण अस्पताल में दूसरे दिन की सूची के हिसाब से किसी भी कर्मचारी को टीका नहीं लग सका।
अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सोमवार सुबह सॉफ्टवेयर से उन लोगों के पास ही दोबारा एसएमएस चला गया, जिन्होंने पहले दिन टीका लगवाया था। इससे जिन कर्मचारियों का सोमवार के लिए पंजीकरण किया था। उन्होंने यहां तक बताया कि सुबह से ही टीका लगाने के लिए लोग नहीं पहुंच रहे थे जिसके बाद टीकाकरण के लिए लोगों की सूची जांचीं गई और उन्हें फोन किया गया। उसके बाद पता चला कि कर्मचारियों के पास कोई मैसेज ही नहीं आया है। दूसरे अस्पतालों में भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा।