गीतांजलि ने फिर खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा: वांगचुक को निजी अस्पताल भेजने की मांग, आज होगी अहम सुनवाई
सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का रुख किया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ आज दोपहर 2:30 बजे इस अपील पर सुनवाई करेगी।
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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) का रुख किया है। उन्होंने एकल पीठ (सिंगल जज) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई थी।
Delhi High Court Division Bench led by Chief Justice Devendra Kumar Upadhyay and Justice Tejas Karia has agreed to hear today at 2:30 PM the appeal filed by Sonam Wangchuk’s wife, Dr Gitanjali Angmo, challenging the Single Judge’s refusal to shift him from Safdarjung Hospital to… https://t.co/D7gdPHxyrn
— ANI (@ANI) July 20, 2026विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने डॉ. गीतांजलि आंग्मो की इस अपील पर आज दोपहर 2:30 बजे सुनवाई करने पर सहमति जताई है। अपील में सिंगल जज के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।
बीते दिन कोर्ट ने अंतरिम आदेश देने से किया था इनकार
रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सोनम वांगचुक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो और अन्य साथियों के लिए अलग रेस्ट रूम उपलब्ध कराने तथा उन्हें वांगचुक से मिलने की अनुमति देने के निर्देश भी दिए थे।
गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद अस्पताल प्रशासन उन्हें डिस्चार्ज करने या किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि वार्ड के बाहर करीब 30 पुलिसकर्मी और पूरे अस्पताल परिसर में 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे उनकी आवाजाही प्रभावित हो रही है। वांगचुक की पत्नी ने इसे चिकित्सकीय देखभाल के बजाय 'अवैध हिरासत' करार दिया है। मामले पर अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट की दोपहर में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।