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अच्छी खबर: पार्किसन की बीमारी से जूझ रहे रोगियों के लिए डीयू ने तैयार की दवा, जल्द बाजार में आने की उम्मीद

Tue, 13 Jul 2021 06:44 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 13 Jul 2021 06:44 AM IST
सार

डीयू में केमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर व डीन एग्जामिनेशन प्रो. डीएस रावत ने बताया कि दवा का फॉर्मूला बनाने के लिए वर्ष 2012 से लगातार स्टडी की जा रही थी।

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delhi university research medicine for parkinson disease
Delhi University - फोटो : amar ujala

विस्तार

पार्किसन की बीमारी से जूझ रहे रोगियों के लिए अच्छी खबर है। अब इस बीमारी के दवा बनाने की बाजार में जल्द आने की उम्मीद जग गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस दवा बनाने के फॉर्मूले को बोस्टन स्थित एक फॉर्मा कंपनी को दे दिया है। इससे पहले दवा का फॉर्मूला विकसित करने के लिए  डीयू ने अस्पताल के साथ करार किया था। अब फॉर्मा कंपनी ही दवा बनाने का काम पूरा करेगी। फॉर्मूला देने के कारण डीयू को इसकी रॉयल्टी मिलती रहेगी। डीयू शैक्षणिक संस्थान होने के कारण दवा बनाने का काम नहीं कर सकता है।  

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डीयू में केमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर व डीन एग्जामिनेशन प्रो. डीएस रावत ने बताया कि दवा का फॉर्मूला बनाने के लिए वर्ष 2012 से लगातार स्टडी की जा रही थी। वर्ष 1987 में नेचर नाम ने एक जर्नल में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी कि मलेरिया की दवा क्लोरोक्यूनिक्स का इस्तेमाल पार्किंसन बीमारी में किया जा सकता है। लेकिन पार्किंसन बीमारी के लिए तैयार किया गया हमारा फॉर्मूला इस दवा में इस्तेमाल फॉर्मूले से बेहतर है। कोई भी फॉर्मा कंपनी या अस्पताल तभी फॉर्मूले में रुचि दिखाता है जब उसे इसमें सफलता दिखाई दे। लिहाजा बोस्टन स्थित मैक्लीन अस्पताल के साथ करार के बाद दोनों संस्थानों ने बोस्टन स्थित फॉर्मा कंपनी नूरऑन फार्मास्युटिकल्स के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ताकि खोजे गए अणुओं को पार्किंसन रोग के उपचार के लिए दवाओं के रूप में विकसित किया जा सके।
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प्रो. रावत ने कहा कि डीयू एक शैक्षणिक संस्थान होने के कारण दवा तैयार करने का काम नहीं कर सकता है। इसके लिए फॉर्मा कंपनी की ही जरुरत होती है। अब बोस्टन स्थित मैक्लीन अस्पताल और फॉर्मा कंपनी ही इसके अगले चरण पर काम करेंगे। दवा बनाने की जिम्मेदारी भी उनकी ही होगी। यह भी वही देखेंगे कि चरणबद्ध तरीके से इसकी सफलता कितनी रहती है। बस हमने उन्हें फॉर्मूला विकसित कर उपलब्ध करा दिया है। फॉर्मूला देने के बाद उम्मीद है कि पार्किंसन की दवा जल्द बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।

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