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दहली दिल्ली : एक माह बाद भी इंतज़ार, जुम्मन अब भी कागजों में अजनबी
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परिवार ने उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल के काटे कई चक्कर, मिली मायूसी
-विकलांग पत्नी तनुजा किसी तरह कर रही गुजारा, पांच बच्चों के सिर से उठ गया पिता का साया
-पहली पत्नी की हो गई थी मौत, उससे हैं दो बच्चे, तनुजा से तीन बच्चे, पांचों बच्चों की देखभाल कर रहा था जुम्मन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लाल किला बम धमाके के एक माह बाद भी जुम्मन के परिवार को उनका मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया है। हादसे के बाद जुम्मन के शव के अवशेष ही बचे थे। परिजनों ने ट्रैक सूट की शर्ट से उसकी पहचान की थी। उस समय पुलिस ने उसे अज्ञात में रखा हुआ था। शव की पहचान होने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव तो हवाले कर दिया। लेकिन बाद में जो कागजात दिए वह अज्ञात शव के थे।
परिवार ने उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल के कई चक्कर काटे। पुलिस ने भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर उसके डेथ सर्टिफिकेट बनवाने की बात की। बहन नाजमा ने बताया कि अब अस्पताल की ओर से उनको कागजात तो मिल गया हैं, लेकिन अभी मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बना है।
वहीं मुआवजे की भी कागजी कार्रवाई जारी है। जुम्मन की पत्नी तनुजा दोनों पैरों से दिव्यांग है, जुम्मन ही उसकी व बच्चों की देखभाल करता था। पत्नी अब रिश्तेदारों व पड़ोसियों पर निर्भर है। दरअसल जुम्मन की पहली पत्नी की मौत हो गई थी। उससे जुम्मन के यहां दो बच्चे थे। दोनों नानी के यहां रह रहे हैं।
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वहीं तनुजा से उसके यहां तीन बच्चे हैं। ई-रिक्शा चलाकर जुम्मन पूरे परिवार को पाल रहा था। शास्त्री पार्क, बुलंद मस्जिद निवासी अच्छा किराया मिलने के लालच में लाल किला चला जाता था। बम धमाके में जुम्मन की मौत हो गई और उसके ई-रिक्शा के परखच्चे उड़ गए। ई-रिक्शा भी उसने किश्तों पर लिया हुआ था। उसकी तीन ही किश्त गई थीं।
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-विकलांग पत्नी तनुजा किसी तरह कर रही गुजारा, पांच बच्चों के सिर से उठ गया पिता का साया
-पहली पत्नी की हो गई थी मौत, उससे हैं दो बच्चे, तनुजा से तीन बच्चे, पांचों बच्चों की देखभाल कर रहा था जुम्मन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लाल किला बम धमाके के एक माह बाद भी जुम्मन के परिवार को उनका मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया है। हादसे के बाद जुम्मन के शव के अवशेष ही बचे थे। परिजनों ने ट्रैक सूट की शर्ट से उसकी पहचान की थी। उस समय पुलिस ने उसे अज्ञात में रखा हुआ था। शव की पहचान होने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव तो हवाले कर दिया। लेकिन बाद में जो कागजात दिए वह अज्ञात शव के थे।
परिवार ने उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अस्पताल के कई चक्कर काटे। पुलिस ने भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर उसके डेथ सर्टिफिकेट बनवाने की बात की। बहन नाजमा ने बताया कि अब अस्पताल की ओर से उनको कागजात तो मिल गया हैं, लेकिन अभी मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बना है।
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वहीं मुआवजे की भी कागजी कार्रवाई जारी है। जुम्मन की पत्नी तनुजा दोनों पैरों से दिव्यांग है, जुम्मन ही उसकी व बच्चों की देखभाल करता था। पत्नी अब रिश्तेदारों व पड़ोसियों पर निर्भर है। दरअसल जुम्मन की पहली पत्नी की मौत हो गई थी। उससे जुम्मन के यहां दो बच्चे थे। दोनों नानी के यहां रह रहे हैं।
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वहीं तनुजा से उसके यहां तीन बच्चे हैं। ई-रिक्शा चलाकर जुम्मन पूरे परिवार को पाल रहा था। शास्त्री पार्क, बुलंद मस्जिद निवासी अच्छा किराया मिलने के लालच में लाल किला चला जाता था। बम धमाके में जुम्मन की मौत हो गई और उसके ई-रिक्शा के परखच्चे उड़ गए। ई-रिक्शा भी उसने किश्तों पर लिया हुआ था। उसकी तीन ही किश्त गई थीं।