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दिल्ली: सोच समझ कर दिया गया था दंगे को अंजाम, हाईकोर्ट ने कहा- साजिश के तहत तोड़े गए सीसीटीवी कैमरे

Tue, 28 Sep 2021 12:55 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Tue, 28 Sep 2021 12:55 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यह हिंसा अचानक ही नहीं भड़क गई, बल्कि इसे सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस साजिश का मकसद दिल्ली की कानून व्यवस्था को बिगाड़ना था।

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Delhi riots were planned and not accidental says Highcourt during hearing of a bail plea
दिल्ली दंगे की तस्वीर - फोटो : जी पॉल

विस्तार

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने सोमवार को हिंसा से संबंधित जमानत के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि यह हिंसा एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी। यह अचानक ही नहीं भड़क गई, बल्कि इसे सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस साजिश का मकसद दिल्ली की कानून व्यवस्था को बिगाड़ना था। मामले की सुनवाई करते हुए जज ने कहा कि दंगों के दौरान सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्थित रूप से तोड़फोड़ भी शहर में कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए पहले से की गई साजिश का हिस्सा थी।
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हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या मामले में हो रही थी सुनवाई
दरअसल जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की कथित हत्या से संबंधित मामले में एक आरोपी मोहम्मद इब्राहिम द्वारा दाखिल जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिस इलाके में हत्या की इस घटना को अंजाम दिया गया, वहां बेहद सुनियोजित ढंग से पहले सीसीटीवी कैमरों के कनेक्शन काटकर उन्हें क्षतिग्रस्त किया गया, उसके बाद भारी संख्या में दंगाईयों ने लाठी, डंडों और अन्य हथियारों से कांस्टेबल रतन लाल पर हमला बोल दिया।
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इसके साथ ही उन्होंने इब्राहिम की जमानत अर्जी खारिज कर दी और कहा कि जिस वीडियो में याचिकाकर्ता तलवार चलाते हुए नजर आ रहा है, वह उसे हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त है। अदालत के पास मौजूद सबूतों के आधार पर इब्राहिम को कई सीसीटीवी फुटेज में तलवार चलाते हुए चिन्हित किया गया है।
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दिसंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था इब्राहिम
बता दें कि हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में इब्राहिम को दिसंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में था। उसने अपनी जमानत अर्जी में कहा था कि वह कभी किसी प्रदर्शन या दंगे का हिस्सा नहीं रहा। इसके साथ ही उसपर लगे आरोपों के आधार पर वह घटना के वक्त घटनास्थल के आसपास भी नहीं था।
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