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प्रदूषण पर सख्ती: तालाब या यमुना में नहीं कर सकेंगे दुर्गा मूर्ति विसर्जन, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने लगाई रोक
Thu, 14 Oct 2021 12:20 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 14 Oct 2021 12:20 PM IST
सार
आदेश में कहा गया है कि दुर्गा पूजा पर नदी, झील, तालाब, कुएं आदि में मूर्ति विसर्जन की परंपरा है और इससे होने वाला प्रदूषण चिंता का विषय है। डीपीसीसी ने कहा है कि मूर्ति विसर्जन से जल स्रोतों को होने वाले नुकसान का आकलन किया गया है।
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दुर्गा पूजा
- फोटो : PTI
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विस्तार
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) ने दुर्गा विसर्जन से पहले आदेश जारी कर यमुना, जल स्रोत, तालाब, घाट या सार्वजनिक स्थान पर दुर्गा मूर्ति विसर्जन करने पर रोक लगा दी है। साथ ही लोगों से घरों में ही मूर्ति विसर्जन करने के लिए कहा है।
डीपीसीसी ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए मूर्ति कलाकारों से मूर्ति पर ऐसे किसी भी प्रकार का रंग या सामग्री इस्तेमाल करने से मना किया है, जिससे पानी को नुकसान पहुंचे और लोगों के स्वास्थ्य पर भी खराब असर पड़े। मूर्ति को प्राकृतिक मिट्टी से तैयार करने के लिए कहा गया है। साथ ही डीपीसीसी ने संबंधित एजेंसियों को प्रत्येक शुक्रवार को रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया है।
आदेश में कहा गया है कि दुर्गा पूजा पर नदी, झील, तालाब, कुएं आदि में मूर्ति विसर्जन की परंपरा है और इससे होने वाला प्रदूषण चिंता का विषय है। डीपीसीसी ने कहा है कि मूर्ति विसर्जन से जल स्रोतों को होने वाले नुकसान का आकलन किया गया है। डीपीसीसी ने मूर्ति बनाने के लिए पीओपी और पकी हुई मिट्टी के प्रयोग पर रोक लगा दी है।
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वहीं ये भी कहा है कि विसर्जन से पहले मूर्तियों से फूल और कागज निर्मित अन्य सजावटी वस्तुओं को हटाने और उन्हें घरों से इकट्ठा कर उनका पर्यावरण अनुरूप तरीके से निपटारा किया जाए।
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डीपीसीसी ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए मूर्ति कलाकारों से मूर्ति पर ऐसे किसी भी प्रकार का रंग या सामग्री इस्तेमाल करने से मना किया है, जिससे पानी को नुकसान पहुंचे और लोगों के स्वास्थ्य पर भी खराब असर पड़े। मूर्ति को प्राकृतिक मिट्टी से तैयार करने के लिए कहा गया है। साथ ही डीपीसीसी ने संबंधित एजेंसियों को प्रत्येक शुक्रवार को रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया है।
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आदेश में कहा गया है कि दुर्गा पूजा पर नदी, झील, तालाब, कुएं आदि में मूर्ति विसर्जन की परंपरा है और इससे होने वाला प्रदूषण चिंता का विषय है। डीपीसीसी ने कहा है कि मूर्ति विसर्जन से जल स्रोतों को होने वाले नुकसान का आकलन किया गया है। डीपीसीसी ने मूर्ति बनाने के लिए पीओपी और पकी हुई मिट्टी के प्रयोग पर रोक लगा दी है।
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वहीं ये भी कहा है कि विसर्जन से पहले मूर्तियों से फूल और कागज निर्मित अन्य सजावटी वस्तुओं को हटाने और उन्हें घरों से इकट्ठा कर उनका पर्यावरण अनुरूप तरीके से निपटारा किया जाए।