{"_id":"602078cc47229c1dd15ac6dd","slug":"delhi-news-youth-are-busy-in-serving-the-gitating-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान आंदोलनः अन्नदाताओं की सेवा में जुटे हैं युवा, लगातार कर रहे हैं संघर्ष का समर्थन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान आंदोलनः अन्नदाताओं की सेवा में जुटे हैं युवा, लगातार कर रहे हैं संघर्ष का समर्थन
Mon, 08 Feb 2021 05:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 08 Feb 2021 05:03 AM IST
विज्ञापन
अनूप सिंह चानौत
- फोटो : अमर उजाला
किसानों की आवाज बुलंद करने के लिए तमाम नौजवान अपना काम धंधा आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। अनूप सिंह चानौत और चरखी दादरी के अंकुर सांगवान मंदौला उन तमाम नौजवानों में से एक हैं जो पहले दिन ही किसान आंदोलन के समर्थन में कूद पड़े थे और अब वह टीकरी बॉर्डर पर आंदोलन आयोजनकर्ताओं के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल हैं।
विज्ञापन
हिसार के गांव मानौत के रहने वाले अनूप सिंह चानौत ने जंबेश्वर विश्वविद्यालय से बायो मेडिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह इसी फील्ड में नौकरी भी कर रहे थे। जिस दिन किसानों का आंदोलन पंजाब से दिल्ली पहुंचा, उस दिन वह बिना अनुमति जंतर-मंतर पर किसानों के समर्थन में मार्च निकालने गए थे। जहां से उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस ने शाम को छोड़ा तो वह सिंघु बॉर्डर पहुंच गए और तीस दिसम्बर को वहां से टीकरी बॉर्डर आए। यहां संयुक्त किसान मोर्चा से मिलकर वालंटियरों की टीम बनाई। सभी ट्रॉलियों से किसानों का मोबाइल नंबर जुटाना शुरू किया।
विज्ञापन
आज उनके पास 72 हजार किसानों का मोबाइल नंबर हैं, जिनमें युवा भी शामिल हैं। इन नंबरों के जरिये अब उनकी टीम किसान आंदोलन की सूचनाएं गांवों तक भेजती है। इसके अलावा एसएमएस के माध्यम से ब्लॉक स्तर पर भी लगातार संदेश भेजे जाते हैं। आंदोलन स्थल पर कहीं कोई दुर्घटना हो जाय तो इसकी सूचना भी उनके बनाए ह्वाट्सएप ग्रुप पर साझा होती है। अनूप कहते हैं कि किसान का बेटा होने के नाते हम इस आंदोलन से जुड़े हैं।
विज्ञापन
उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही किसान मोर्चा की सरकार से मीटिंग होगी। वह चाहते हैं कि वैशाखी से पहले किसानों का काम हो जाए। इसी तरह एमडीयू रोहतक से बीए अंतिम वर्ष के छात्र अंकुर सांगवजान मंदौला का पूरा परिवार किसान है। किसान सोशल आर्मी में रहकर वह वालंटियर का काम कर रहे हैं। अंकुर ने 25 से 30 दिसम्बर के बीच चरखी दादरी से दिल्ली के किसान घाट तक 150 किलोमीटर की पैदल यात्रा निकाली थी। लेकिन उन्हें नांगलोई में पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। बाद में पुलिस ने छोड़ा तो वह पूरी तरह टीकरी बॉर्डर पर किसानों की सेवा में लग गए।