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अमर उजाला खास : डीटीयू की पहल, अब प्रोजेक्ट वर्क के मूल्यांकन से मिलेगी डिग्री
Wed, 21 Apr 2021 05:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 21 Apr 2021 05:55 AM IST
सार
- दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने पारंपरिक वार्षिक परीक्षा के आधार पर पास या फेल करने की योजना की खत्म
- बीटेक और एमटेक प्रोग्राम के छात्रों का सालभर विभिन्न प्रोजेक्ट से चलता रहेगा मूल्यांकन
- इसी के आधार पर अंक या ग्रेड मिलेंगे
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विस्तार
वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते शिक्षण संस्थान बंद हैं। देशभर के स्कूल और विश्वविद्यालयों की वार्षिक परीक्षा न होने के कारण शैक्षणिक सत्र तीन से चार महीने की देरी से चल रहे हैं। ऐसे में दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू ) ने नई शिक्षा नीति के तहत पारंपरिक वार्षिक परीक्षा के आधार पर पास या फेल करने की योजना खत्म करके साल भर के मूल्यांकन पर डिग्री देने की शुरुआत की है। इसके साथ ही डीटीयू देश में समय से शैक्षणिक सत्र पूरा करके डिग्री देने वाला पहला विश्वविद्यालय बन गया है।
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दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पिछले सालों तक पारंपरिक परीक्षा पद्धति के तहत वार्षिक परीक्षा में छात्र द्वारा सवालों के दिए गए जवाब के आधार पर अंक मिलते थे। इसी के आधार पर रिजल्ट तैयार होता था और डिग्री मिलती थी। इस परीक्षा पद्धति के चलते छात्र विषय को समझने की बजाय रट्टा लगाकर परीक्षा पास करते थे। इससे छात्र को विषय की पूर्ण समझ नही होती थी। छात्रों के सम्पूर्ण विकास के चलते विश्वविद्यालय ने सालभर के मूल्यांकन से रिजल्ट तैयार करने की पहल की है।
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80 फीसदी मूल्याकंन :
सालभर चलने वाले वाले प्रोजेक्ट वर्क, इनोवेशन, रिसर्च आदि के माध्यम से 80 फीसदी का मूल्यांकन होगा। इसी के आधार पर उनको फाइनल डिग्री में अंक या ग्रेड दिए जाएंगे। इसके अलावा फाइनल परीक्षा में महज 20 फीसदी के प्रश्न पूछे जाएंगे।
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रट्टा की बजाय छात्रों की सोच व हुनर के आधार पर विकास
नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों में रट्टा वाली पढ़ाई की योजना को समाप्त किया गया है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई वाले छात्रों का प्रोजेक्ट वर्क, रिसर्च, इनोवेशन के आधार पर उनका कौशल विकास करना है, ताकि वे किसी भी समस्या का निदान कर सकें। इसके अलावा रोजगार के साथ स्टार्टअप में अपनी कंपनी खोल सकते हैं। वार्षिक परीक्षा में पहले तीन घंटे की परीक्षा से उनका मूल्यांकन होता था, जिससे उनको पास या फैल के अंक या ग्रेड मिलते थे। पर अब सालभर मूल्यांकन होता रहेगा। इससे छात्र की सही रूप से प्रतिभा निखरकर आएगी।
-प्रो. योगेश सिंह, कुलपति, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय