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टूलकिट मामला: पीटर फ्रेडरिक से सीधे संपर्क में थी निकिता जैकब, मोबाइल और लैपटॉप से मिले सुबूत

Thu, 18 Feb 2021 04:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 18 Feb 2021 04:56 AM IST
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Toolkit Probe News: Delhi News : Nikita Jacob was in direct touch with Peter Frederick
टूलकिट’ मामला: निकिता जैकब - फोटो : Social Media

बॉम्बे हाईकोर्ट से भले ही निकिता जैकब को राहत मिल गई हो, लेकिन दिल्ली पुलिस सूत्रों का कहना है कि उनके पास निकिता की गिरफ्तारी के पर्याप्त सबूत हैं। 11 फरवरी को दिल्ली पुलिस की टीम ने निकिता जैकब के मुंबई स्थित घर की 13 घंटे तक तलाशी ली थी। इस दौरान पुलिस ने निकिता के दो लैपटॉप और एक आईफोन जब्त करने के अलावा कुछ दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिये थे। 

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निकिता के मोबाइल फोन और लैपटॉप की जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि निकिता सीधे खालिस्तानी समर्थक पीटर फ्रेडरिक के संपर्क में थी। वह लगातार खालिस्तानी संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का ईमेल भी इस्तेमाल कर रही थी। छानबीन के बाद पता चला है कि शांतनु और निकिता के कहने पर ही दिशा रवि ने स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को टूलकिट भेजी थी।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार चूंकि अचानक निकिता के घर पर छापेमारी की गई थी, इसलिए उसके मोबाइल और लैपटॉप में ज्यादातर डाटा पुलिस के हाथ लग गया हैं। निकिता के मोबाइल पर व्हाटसऐप चैट से पता चला है कि पीटर फ्रेडरिक से वह लगातार चैट रही थी। वह चैट के दौरान ऐसे ऐप के बारे में पीटर से पूछ रही थी, जिससे सुरक्षित सारे काम किए जा सके। 
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किसान आंदोलन की शुरूआत के साथ ही विदेशों में बैठे एमओ धालीवाल और पीटर फ्रेडरिक ने किसान आंदोलन को बड़ा बनाने और किसानों में अस।ंतोष पैदा करने की योजना बना ली। इसके लिए दिसंबर से ही प्लानिंग होने लगी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि निकिता और शांतनु मुलुक पहले से पाएटिक जस्टिस फाउडेशन से जुड़े थे। वहीं दोनों पर्यावरण के लिए आवाज उठाने वाली एनजीओ -एक्सआर- से भी जुड़े हुए थे। इसमें दिशा रवि के अलावा कई देशों के पर्यावरणविद भी जुड़े थे।

शांतनु ने अपने मेल आईडी से टूलकिट का निर्माण करवाया। निकिता और दिशा ने उसमें एडिटिंग की। चूंकि टूलकिट को दुनियाभर के सेलिब्रिटीज को भेजे जाना था। इसलिए निकिता के कहने पर दिशा ने अपनी जानकार स्वीडन की ग्रेटा थनबर्ग को बिना एडिट की हुई टूलकिट शेयर कर दी। इसमें जब इनके नाम भी चले गए तो दिशा के होश उड़ गए। उसने तुरंत उसे डिलीट करवाया और एडिट की हुई टूलकिट भेजी गई।

हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी। दिशा को जब भारी भूल का पता चला तो उसने तीन फरवरी से ही अपने मोबाइल व लैपटॉप से सबूत मिटाना शुरू कर दिए। हालांकि निकिता इससे चूक गई और उसके लैपटॉप और मोबाइल से पुलिस को अहम सुराग हाथ लग गए। पुलिस ने शांतनु के घर भी छापामारी कर उसके यहां से भी इलेक्ट्रॉनिक गेजेट बरामद किए हैं।

ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट ट्वीट न करती तो शायद न हो पाता टूलकिट का खुलासा...
26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस की सभी एजेंसियों ने हिंसा की जांच शुरू कर दी। लोकल पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच, स्पेशल सेल और साइबर सेल हिंसा की साजिश से पर्दा उठाने में जुट गई। 3 फरवरी को साइबर सेल के साथ ग्रेटा थनबर्ग का वह ट्वीट लग गया, जिसमें उसने गलती से बिना एडिट की हुई टूलकिट ट्वीट कर दी थी। ट्वीट होते ही चंद ही मिनटों में दिल्ली पुलिस के पास ग्रेटा का वह ट्वीट पहुंच गया। उसमें शांतनु, दिशा और निकिता के नाम थे। इसी आधार पर पुलिस ने छानबीन की। दूसरी ओर दिशा को भी गलती का पता चल चुका था। उसे भी पकड़े जाने का डर सताने लगा। बाद में उसने ग्रेटा से चैट कर ट्वीट को तुरंत हटाने के लिए कहा।

20 जनवरी को फाइनल हुआ था टूलकिट का ड्राफ्ट

टूलकिट मामले की जांच आगे बढ़ने के क्रम में हर रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस को पता चला है कि 20 जनवरी को टूलकिट का ड्राफ्ट फाइनल हो गया था। 23 जनवरी को ड्राफ्ट की फाइनल कॉपी निकिता के पास आई थी। इससे पहले कई बार जूम पर इन लोगों ने मीटिंग की थी।

बुधवार को पुलिस ने मैरिना पेटरसन नामक एक महिला के नाम का खुलासा किया। युनाइटेड किंगडम में रहने वाली यह महिला पाएटिक जस्टिस फाउंडेशन से जुड़ी हुई है। टूलकिट ड्राफ्ट कराने में इसकी भी भूमिका सामने आई है।  वहीं, एक अन्य महिला थिलाका का भी नाम सामने आया है। वह एक्सआर नामक एनजीओ से जुड़ी होने के अलावा पीजेएफ की पुनीत की करीबी है। 

जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि सभी एक-दूसरे से वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) के प्रोटोन, टेलीग्राम और सिग्नल के जरिये ही जुड़ते थे। कुछ मामलों में इनके व्हाट्सऐप से चैट का भी पता चला है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि नवंबर के आखिरी सप्ताह में किसान आंदोलन की शुरूआत होते ही टूलकिट के निर्माण की प्लानिंग शुरू हो गई थी। इसके लिए पीजेएफ की पुनीत ने -फ्राइडे फॉर फ्यूचर-के साथ काम करने वाली निकिता और दिशा का पता लगाया। शांतनु इनके साथ एक्सआर एनजीओ से जुड़ा था। टूलकिट तैयार करने के लिए एक दिसंबर को पुनीत ने इंस्टाग्राम के जरिये तीनों से संपर्क किया। इसके बाद दिशा ने 6 दिसंबर को एक व्हाट्सऐप ग्रुप बना लिया। सभी एक दूसरे से जुड़े रहे और टूलकिट के बारे में बातचीत करते रहे। 3 जनवरी से टूलकिट के लिए काम शुरू हो गया। 20 जनवरी को दिशा, निकिता और शांतनु ने टूलकिट को ड्राफ्ट किया। बाद में 23 जनवरी को पीजेएफ ने फाइनल टूलकिट निकिता को सौंप दिया।

26 जनवरी को ग्लोबल डे ऑफ एक्शन के लिए काम शुरू कर दिया गया। पीजेएफ से जुड़ी मैरिना पेटरसन ने 31 जनवरी को दोबारा निकिता और शांतनु को टूलकिट एडिट करने के लिए दी। इसमें कहा कि आंसू गैस और गोले चलने की बात भी वह इसमें शामिल करें। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि मैरिना धालीवाल पीजेएफ में मैनेजर है। टूलकिट को लेकर इन लोगों ने मार्च तक की प्लानिंग की हुई थी। लेकिन संयोग से ग्रेटा थनबर्ग ने गलती से उसे ट्वीटर पर शेयर कर दिया तो सारा राज खुल गया। पुलिस अब मामले में दिशा, निकिता और शांतनु के बैंक अकाउंट की जांच भी करने की तैयारी कर रही है। उनके पिछले एक साल के बैंक अकाउंट की डिटेल खंगाली जाएगी। टूलकिट मामले की फंडिंग किसने की, यह सब जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।

पिछले साल उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जोड़कर भी जांच करेगी पुलिस...
सीएए के विरोध और समर्थन में पिछले साल फरवरी में हुई हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर ठीक इसी का प्रचार-प्रसार और झूठी खबरें चलाई गई। पुलिस आशंका जता रही है। उस समय हिंसा के दौरान झूठी खबरें फैलाकर दंगा भड़काने की साजिश रची गई। पूरी दिल्ली में डर का माहौल पैदा हो गया। पुलिस उसको भी इस तरह की टूलकिट से ही जोड़कर देख रही है। किसान आंदोलन के दौरान सिख फॉर जस्टिस और पाएटिक जस्टिस फाउंडेशन की भूमिका सामने आई है। हालांकि पिछले साल आरोपी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए थे। मौजूदा टूलकिट में एक फरवरी को लेकर भी प्लानिंग का जिक्र था।

शांतनु ने युवाओं को करवाए वीडियो और फोटो शेयर...
छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि शांतनु 20 से 27 जनवरी के बीच टीकरी बॉर्डर पर था। वह तीन से पांच घंटे का समय बॉर्डर पर बिताकर युवाओं के संपर्क में रहता था। यहां वह उनको वीडियो और फोटो भेजकर ज्यादा से ज्यादा शेयर करने के लिए कहता था। 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद अगले दिन वह वापस पुणे लौट गया। पुलिस का कहना है कि शांतनु से पूछताछ के बाद ही आगे की जांच हो पाएगी।

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