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कर्जा लेकर खरीदी महंगी, किस्त न चुकाने पर पांच लाख का जुर्माना और अदालत की फटकार
Thu, 22 Jul 2021 06:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 22 Jul 2021 06:18 AM IST
सार
- अदालत का समय नष्ट करने पर कारण बताओं नोटिस
- अदालत ने गुस्से के साथ कहा- क्यों न की जाए कार्रवाई
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हाईकोर्ट ने कार खरीदने के लिए लिए गए ऋण का भुगतान करने के वायदे से मुकरने पर अबान एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड व उसके प्रबंधक निदेशक पर पांच लाख रुपये जुर्माना कर दिया। इतना ही नहीं अदालत ने दोनों को कारण बताओं नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि अदालत का समय नष्ट करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने कंपनी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि कोरोना महामारी के चलते उसे किश्तों के भुगतान के लिए समय चाहिए। उन्होंने कहा कि कंपनी ने बेंटले कॉन्टिनेंटल फ्लाइंग एस वी8 जैसी लक्जरी कार अपने प्रबंध निदेशक के प्रयोग के लिए खरीदी है न कि व्यावसायिक प्रयोग के लिए। अदालत ने याची कंपनी ने पिछली सुनवाई 9 जुलाई को आश्वासन दिया था कि वह एक सप्ताह में लंबित किश्तों का ब्याज सहित भुगतान कर देगी। कंपनी ने अपने वायदे का सम्मान नहीं किया और अब पुन: किश्तों की अदायगी के लिए समय मांग रही है। उनका मानना है कि प्रथम दृष्टया कंपनी को ऐसे मामले में राहत प्रदान नहीं की जा सकती।
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अदालत ने कहा कंपनी व उसके प्रबंध-निदेशक ने अदालत के समय को नष्ट किया है ऐसे में वे स्पष्ट करे कि किश्तों की अदायगी करने का वायदा करने के लिए बावजूद पैसों का भुगतान क्यों नहीं किया गया। अदालत ने मामले की सुनवाई 29 जुलाई तय करते हुए उसे जुर्माने की राशि दिल्ली हाईकोर्ट लीगल सर्विस में जमा करने का निर्देश दिया है।
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इतना ही नहीं अदालत ने ऋण प्रदान कंपनी को कार को तुंरत कब्जे में लेने की स्वतंत्रता प्रदान करने व इस काम में स्थानीय पुलिस स्टेशन की पुलिस की सहायता लेना की स्वतंत्रता प्रदान कर दी।
पेश मामले के अनुसार कंपनी ने बीएमडब्ल्यू की महंगी कार 2.84 करोड़ रुपये का ऋण बीएमडब्ल्यू इंडिया फाईनेशियल सर्विस से लेकर खरीदी थी। तय शर्तो के अनुसार कंपनी ने 5.10 लाख रुपए हर महीने 76 किस्तों में देने का वादा किया था। यह लोन दिसंबर 2015 में लिया गया था। उसके बाद कंपनी लोन चुकता करती रही।
कोरोना काल में कंपनी ने संबंधित ऋण प्रदान कंपनी से आग्रह किया की महामारी की वजह से उसके लोन का किस्त चुकाने के लिए कुछ समय और दे। कार कंपनी ने छूट देने से इंकार करने पर कार खरीदने वाली कंपनी ने मार्च 2000 से किस्त देना बंद कर दिया।
ऋण प्रदान करने वाली कंपनी ने उसके बाद सितंबर 2000 में करार को निरस्त कर कार जब्त करने का आदेश पारित कर दिया। कार खरीदने वाला कंपनी ने उसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गाड़ी जब्त करने पर रोक लगाने की मांग की। याची ने तर्क रखा कि कोरोना काल में सभी कंपनियों को बकाया अदा करने के लिए छूट दी गई है। इसलिए उसे भी छूट दिया जाए।