दिल्ली : किसानों ने बातचीत की पहल करके प्रधानमंत्री को पत्र भेजा, वार्ता का आग्रह
- दोबारा बातचीत के लिए संयुक्त किसान मोर्चा का प्रधानमंत्री को पत्र
- 26 जनवरी की हिंसा के बाद से दोनों पक्षों के बीच नहीं हुई बातचीत
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संयुक्त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर तीनों कृषि कानूनों पर दोबारा बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है। 26 नवंबर, 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर 40 से अधिक किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे हैं। इससे पहले भी सरकार और किसानों के बीच कृषि कानूनों पर कई दौर की बातचीत के बावजूद गतिरोध जारी है।
किसान संगठनों की तरफ से शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रदर्शनकारी किसान, सरकार से दोबारा बातचीत के लिए तैयार हैं। इससे पहले 22 जनवरी को सरकार के प्रतिनिधियों ने किसान नेताओं से मुलाकात की थी। 26 जनवरी को हुई ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद से दोनों पक्षों के बीच बातचीत नहीं हो सकी है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर किसानों से बातचीत फिर से शुरू करने की मांग की है। मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पत्र में किसान आंदोलन के कई पहलुओं पर सरकार को पूरी जानकारी न होने की बात कही गई है। कृषि कानूनों पर बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संयुक्त किसान मोर्चा ने लिखा है कि अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे किसान नहीं चाहते हैं कि महामारी काल में किसी की सेहत प्रदर्शनकारियों की वजह से प्रभावित हो।
लेकिन आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी के लिए किसान पिछले करीब छह महीने से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनरत हैं। किसानों के लिए यह मामला जिंदगी और मृत्यु से जुड़ा है, इसलिए मांगों पर सुनवाई होने तक आंदोलन खत्म भी नहीं कर सकते हैं।
कोई भी सरकार लोकतांत्रिक सरकार किसानों की ओर से खारिज कानून को निरस्त कर देती। सरकार ने किसानों से एमएसपी की कानूनी का हक छीन लिया। पत्र में लिखा है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते देश के प्रधानमंत्री से दोबारा किसानों की मांगों पर बातचीत का आग्रह किया है।
26 मई को काला दिवस के तौर पर मनाने की पहले की थी घोषणा
किसान आंदोलन के छह महीने पूरा होने पर 26 मई को किसानों ने %काला दिवस% के रूप में मनाने की घोषणा की थी।किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने विवादित कृषि कानूनों के विरोध में लोगों से 26 मई को अपने घरों, वाहनों और दुकानों पर काले झंडे लगाने की अपील की थी। दोबारा बातचीत की शुरुआत और किसानों और सरकार के बीच गतिरोध खत्म होने की एक बार फिर उम्मीद बंधने लगी है।
कोरोना के नाम पर टूटने नहीं देंगे आंदोलन
पिछले 177 दिनों से अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। किसान संगठनों का आरोप है कि कोरोना के नाम पर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश लगातार की जा रही है। जब तक किसानों की मांगे पूरी नहीं होती, आंदोलनकारी पीछे नहीं हटेंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा के एक वरिष्ठ सदस्य ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले पटियाला के किसान की मौत की वजह कोरोना से इसलिए बताई गई ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि मांगे पूरी होने पर ही किसान घर लौटेंगे। किसान नेता का आरोप है कि सरकार ने न तो वैक्सीनेशन की शुरुआत की और न ही किसानों को किसी तरह की चिकित्सा सुविधा मुहैया की जा रही है। हालांकि 40 निजी डॉक्टरों के सहयोग से आंदोलकारियों सहित आसपास के ग्रामीणों की सेहत का भी ध्यान रखा जा रहा है।
संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने केंद्र और पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की सेहत का दोनों सरकारों से अधिक ध्यान रखा जा रहा है। कोविड से बचाव के लिए मास्क, काढ़ा, गरम पानी, विटामिन सी और डी की गोलियां आंदोलनकारियों को बांटी जा रही है जबकि सिंघु बॉर्डर पर 10 बेड का अस्पताल भी है। अगर, किसी आंदोलनकारी को ऑक्सीजन की जरूरत हो तो उसके लिए भी इंतजाम किए गए हैं।
किसानों की सेहत पर डॉक्टरों की लगातार नजर
आंदोलनकारियों की सेहत की देखभाल के लिए 40 डॉक्टरों की टीम है। इनमें एक डॉक्टर न्यू जर्सी से भारत पहुंचकर लगातार किसानों की सेवा में जुटे हुए हैं। राजेवाल ने कहा कि डॉक्टरों की टीम न केवल आंदोलनकारी बल्कि आसपास के ग्रामीणों को भी चिकित्सा सुविधा मुहैया कर रहे हैं।
राकेश टिकैत को जान से मारने की धमकी, मांगी रंगदारी
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत को फोन पर जान से मारने की धमकी देने और रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। आरोप है कि व्हाट्सएप पर गाली-गलौज और अश्लील वीडियो भी भेजे जा रहे हैं। रंगदारी नहीं देने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी जा रही है। भाकियू के जिला प्रभारी गाजियाबाद की ओर से कौशांबी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
भाकियू के गाजियाबाद जिला प्रभारी जय कुमार मलिक की ओर से कौशांबी थाने में दी गई तहरीर में बताया कि भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के मोबाइल पर अलग अलग नंबरों से धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। साथ ही व्हाट्सएप पर गाली गलौज और अश्लील वीडियो भेजे जा रहे हैं। उनका कहना है कि संभवत: ये अश्लील वीडियो तस्वीरों से छेड़छाड़ कर बनाए गए हैं। कई बार इसे नजरअंदाज किया गया, लेकिन लगातार कॉल कर जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
इसके साथ ही आरोप 11 हजार रुपये की रंगदारी भी मांग रहा है। रंगदारी नहीं देने पर व्हाट्सएप पर भेजे गए अश्लील वीडियो को वायरल करने की धमकी दे रहा है। जय कुमार की ओर से कौशांबी थाने में बृहस्पतिवार शाम को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की गई। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। नंबरों के आधार पर सर्विलांस की मदद से आरोपियों की तलाश की जा रही है। जल्द आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।
जल्द नहीं पकड़े आरोपी तो नंबर करेंगे सार्वजनिक
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का पूरे मामले में कहना है कि जल्द ही अगर पुलिस आरोपी को पकड़कर घटना का खुलासा नहीं करती है तो वह यह सभी नंबरों को सार्वजनिक करेंगे।
पूर्व में दो बार मिल चुकी है धमकी
दिसंबर और 13 अप्रैल को भी राकेश टिकैत को कॉल कर जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसके बाद कौशांबी थाने में दोनों बार रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। दिसंबर में धमकी देने के मामले में बिहार के एक युवक को पुलिस ने पकड़ा था। जिससे कोर्ट में पेश करने पर जमानत मिल गई थी। जबकि अप्रैल माह में धमकी देने के मामले में आगरा मंडल के फिरोजाबाद जिले का युवक सामने आया था। एसएचओ कौशांबी ने बताया कि उसकी दिमागी हाल ठीक नहीं थी। उसे नोटिस थमाया गया था।