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दिल्ली: शराब की 259 निजी दुकानें बंद, डेढ़ महीने तक सरकारी दुकानों पर होगी बिक्री
Fri, 01 Oct 2021 08:29 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 01 Oct 2021 08:29 AM IST
सार
देश की राजधानी दिल्ली में केजरीवाल सरकार की नई आबकारी नीति की सिफारिशों के तहत शराब की 259 निजी दुकानें बंद कर दी गई हैं। अब डेढ़ महीने तक सरकारी दुकानों पर बिक्री होगी।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली में शराब की निजी दुकानों के बंद होने से करीब 3000 कर्मियों को रोजगार की चिंता सताने लगी हैं। बृहस्पतिवार को काम का आखिरी दिन होने के बाद दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित होने वाली शराब की निजी दुकानें बंद कर दी गई हैं दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति की सिफारिशों के तहत शराब की 259 निजी दुकानें बंद कर दी गई हैं।
बृहस्पतिवार शाम के बाद दिल्ली में शराब की 259 निजी दुकानें बंद किए जाने से कर्मियों को जहां रोजगार की चिंता सताने लगी। सरकारी दुकानों पर भी भीड़ बढ़ने लगी। नई नीति के तहत निजी सहित सभी 850 शराब की दुकानें खुली निविदा के जरिये निजी फर्मों को दे दिए गए हैं।
नए लाइसेंस धारक 17 नवंबर से शराब की खुदरा बिक्री करने लगेंगे। इस दौरान करीब डेढ़ महीने तक केवल सरकार की ओर से संचालित होने वाली दुकानों पर ही शराब की बिक्री की जाएगी। 16 नवंबर के बाद सरकारी दुकानें भी बंद हो जाएंगी।
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शराब की निजी दुकानों को स्थायी तौर पर बंद करने के आदेश से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मालिकों और वहां के कर्मचारियों ने भी जीवन यापन के लिए दूसरे विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। इनमें से कुछ तो प्रॉपर्टी कारोबार तो कई ऐसे हैं जो निजी उद्यम लगाने या नौकरी की तलाश करने लगे हैं। इससे प्रभावित कुछ ऐसे भी लोग हैं जो नौकरी छोड़कर रिटायरमेंट के बारे में सोचने लगे हैं।
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बृहस्पतिवार शाम के बाद दिल्ली में शराब की 259 निजी दुकानें बंद किए जाने से कर्मियों को जहां रोजगार की चिंता सताने लगी। सरकारी दुकानों पर भी भीड़ बढ़ने लगी। नई नीति के तहत निजी सहित सभी 850 शराब की दुकानें खुली निविदा के जरिये निजी फर्मों को दे दिए गए हैं।
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नए लाइसेंस धारक 17 नवंबर से शराब की खुदरा बिक्री करने लगेंगे। इस दौरान करीब डेढ़ महीने तक केवल सरकार की ओर से संचालित होने वाली दुकानों पर ही शराब की बिक्री की जाएगी। 16 नवंबर के बाद सरकारी दुकानें भी बंद हो जाएंगी।
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शराब की निजी दुकानों को स्थायी तौर पर बंद करने के आदेश से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मालिकों और वहां के कर्मचारियों ने भी जीवन यापन के लिए दूसरे विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। इनमें से कुछ तो प्रॉपर्टी कारोबार तो कई ऐसे हैं जो निजी उद्यम लगाने या नौकरी की तलाश करने लगे हैं। इससे प्रभावित कुछ ऐसे भी लोग हैं जो नौकरी छोड़कर रिटायरमेंट के बारे में सोचने लगे हैं।
कर्मचारियों के पास नहीं है कोई और विकल्प
एक कर्मी नीलेष ने कहा कि निजी दुकानें बंद होने से उनकी मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी। कोई नौकरी या कारोबार न होने की वजह से वह अपने गृहनगर मुरादाबाद में जाने की सोच रहे हैं। भविष्य की चिंता सताने लगी है, क्योंकि मेरे पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। सरकार की नई शराब नीति के तहत सभी निजी शराब की दुकानें बंद की जा रही है, इसलिए मेरे पास घर लौटने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
नई दुकानों के प्रबंधक के तौर पर काम करने के लिए हैं राजी
दिल्ली लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश गोयल का कहना है कि निजी दुकानें बंद होने से इस व्यवसाय से जुड़े कर्मियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कुछ दुकानों के मालिक अब अपने दूसरे कारोबार की तरफ ध्यान केंद्रित करेंगे। कर्मियों ने नौकरी की तलाश शुरू कर दी है तो कुछ ऐसे भी हैं जो 16 नवंबर के बाद नई दुकानों में मैनेजर की नौकरी की तैयारी में हैं।
32 जोन में खुलेंगी शराब की दुकानें
नई आबकारी नीति के तहत दिल्ली के 32 अलग अलग इलाकों में शराब की दुकानें स्थापित की जाएंगी। परंपरागत दुकानों से यहां सेवाएं कुछ अलग होंगी और अपनी पसंद के ब्रांड को चुनने का विकल्प होगा। कुछ जगहों पर अल्पाहार और खानपान की भी सुविधा होगी। गोयल ने कहा कि पुराने विक्रेताओं को समायोजित करने के लिए नीति में कुछ प्रावधान होना चाहिए ताकि अचानक उनपर बोझ न बढ़े।
कर्मी अपने गृह राज्यों का रुख करने की तैयारी में
एक कारोबारी वीरेंद्र कुमार जाटव ने कहा कि करीब 3,000 कर्मचारियों का भविष्य दांव पर है, क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। बड़े कारोबारी तो दूसरे व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, लेकिन दुकानों के कर्मचारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कई लोग अपने गृहनगर वापस जा रहे हैं। जाटव ने कहा कि सरकार को इन कर्मचारियों के भविष्य के लिए भी सोचना चाहिए।
नई दुकानों के प्रबंधक के तौर पर काम करने के लिए हैं राजी
दिल्ली लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश गोयल का कहना है कि निजी दुकानें बंद होने से इस व्यवसाय से जुड़े कर्मियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कुछ दुकानों के मालिक अब अपने दूसरे कारोबार की तरफ ध्यान केंद्रित करेंगे। कर्मियों ने नौकरी की तलाश शुरू कर दी है तो कुछ ऐसे भी हैं जो 16 नवंबर के बाद नई दुकानों में मैनेजर की नौकरी की तैयारी में हैं।
32 जोन में खुलेंगी शराब की दुकानें
नई आबकारी नीति के तहत दिल्ली के 32 अलग अलग इलाकों में शराब की दुकानें स्थापित की जाएंगी। परंपरागत दुकानों से यहां सेवाएं कुछ अलग होंगी और अपनी पसंद के ब्रांड को चुनने का विकल्प होगा। कुछ जगहों पर अल्पाहार और खानपान की भी सुविधा होगी। गोयल ने कहा कि पुराने विक्रेताओं को समायोजित करने के लिए नीति में कुछ प्रावधान होना चाहिए ताकि अचानक उनपर बोझ न बढ़े।
कर्मी अपने गृह राज्यों का रुख करने की तैयारी में
एक कारोबारी वीरेंद्र कुमार जाटव ने कहा कि करीब 3,000 कर्मचारियों का भविष्य दांव पर है, क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। बड़े कारोबारी तो दूसरे व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, लेकिन दुकानों के कर्मचारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कई लोग अपने गृहनगर वापस जा रहे हैं। जाटव ने कहा कि सरकार को इन कर्मचारियों के भविष्य के लिए भी सोचना चाहिए।
106 वार्डों में डेढ़ महीने तक शराब की नहीं होगी बिक्री
दिल्ली सरकार ने अपनी नई आबकारी नीति के तहत शहर को 32 क्षेत्रों में बांट दिया है। इसके तहत 8-10 वार्ड वाले प्रत्येक जोन में कुल 27 विक्रेता होंगे। शहर में 26 नगरपालिका वार्ड हैं जहां 30 सितंबर के बाद शराब की कोई भी दुकान नहीं खुलेगी। उन वार्डों में केवल निजी वेंडर के पास ही शराब की दुकानें थीं। पहले ही दिल्ली में ऐेसे 80 वार्ड हैं, जहां शराब की दुकानें नहीं हैं।
दिल्ली सरकार ने अपनी नई आबकारी नीति के तहत शहर को 32 क्षेत्रों में बांट दिया है। इसके तहत 8-10 वार्ड वाले प्रत्येक जोन में कुल 27 विक्रेता होंगे। शहर में 26 नगरपालिका वार्ड हैं जहां 30 सितंबर के बाद शराब की कोई भी दुकान नहीं खुलेगी। उन वार्डों में केवल निजी वेंडर के पास ही शराब की दुकानें थीं। पहले ही दिल्ली में ऐेसे 80 वार्ड हैं, जहां शराब की दुकानें नहीं हैं।