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दिल्ली : डिजिटल युग में पुराने सिक्के करा रहे हैं इतिहास से रूबरू, दर्शन करने के लिए चले आइए चांदनी चौक

Mon, 02 Oct 2023 05:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा नितिन, नई दिल्ली
नितिन, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Oct 2023 05:42 AM IST
सार

मुद्राएं मानव सभ्यता के क्रमिक विकास को समझने में मदद करती हैं। अगर मुद्राओं के माध्यम से बदलते समाज के साथ भारत और विश्व के दर्शन करने हैं तो चले आइए चांदनी चौक। 

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Delhi: In the digital age, old coins are introducing us to history.
चांदनी चौक में बिक रहे हैं मगलकाल और तुगलक काल के सिक्के... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुद्राएं हमें इतिहास से रूबरू कराती हैं। ये मानव सभ्यता के क्रमिक विकास को समझने में मदद करती हैं। अगर मुद्राओं के माध्यम से बदलते समाज के साथ भारत और विश्व के दर्शन करने हैं तो चले आइए चांदनी चौक।  डिजिटल युग में भी यहां लोग इन सिक्कों निहारते व इनकी जानकारी लेते दिख जाएंगे। चांदनी चौक की पटरियों के किनारे पुरानी सिक्कों की दुकानें अब भी यहां आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर इतिहास से रूबरू करा रही है। यहां पुराने सिक्कों की लगभग 80 के करीब दुकानें मौजूद हैं। इनके पास उन शासकों, साम्राज्य व सरकारों के सिक्के भी बिकते हुए मिल जाएंगे, जो अब इतिहास का हिस्सा हैं। 

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पत्थर, टेराकोटा व धातु की दुर्लभ मुद्राएं हैं मौजूद  
यहां कुषाण, मुगल व ब्रिटिश काल के सिक्के दिखने में मामूली कीमत में मिल जाएंगे। आजादी पूर्व राजा-महाराजाओं, मुगल शासक, बादशाह व सुलतानों के राज में चलन में रहीं मुद्राओं का आकर्षक तो यहां हैं ही। आजादी के बाद देश में सिक्कों की विविधता से यहां साक्षात्कार होने का मौका मिल रहा है। यहां पत्थर, टेराकोटा व धातु की दुर्लभ मुद्राओं भी है, जो दो से ढाई हजार वर्ष पुरानी बताई जा रही हैं। इसी तरह मुगल साम्राज्य व हैदराबादी में लेन-देन में प्रयोग होने वाली मुद्राएं लोगों को अचंभित कर रही है। इनके पास आना, धेले, पाई, टका, अठन्नी व चवन्नी आदि सिक्के हैं। 
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कुषाण काल के सिक्के भी मौजूद
पुराने सिक्कों का संकलन करने वाले 76 वर्षीय सत्संग नारायण शर्मा ने बताया कि उनके पास 78 ईसवी के कुषाण काल के दो सिक्के, मुगल काल के 7 सिक्के, तुगलक काल के दो सिक्के व हैदराबादी चवन्नी मौजूद है। कुषाण काल वाले सिक्कों में ब्राह्मणी लिपि भाषा का उपयोग किया गया है। वहीं, मुगल काल व तुगलक काल के सिक्कों में हिजरी भाषा देखने को मिल जाएगी। यह बेशकीमती सिक्के पर्यटकों को इनकी दुकान पर आने के लिए विवश कर देते है। इनकी दुकान की प्रदर्शनी सैलानियों को दूर से ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1962 से पुराने सिक्के वा नोटों की दुकान चला रहे है। उनके पास रानी विक्टोरिया, किंग जॉर्ज, ईस्ट इंडिया कंपनी के सिक्कों का संकलन हैं। जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बहुत अधिक है। 
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400 रुपये में बेचा रानी विक्टोरिया का सिक्का
पुरानी मुद्राओं को बेचने वाले सुरेंद्र ने बताया कि उन्होंने हाल ही में रानी विक्टोरिया का सिक्का चार सौ रुपये में बेचा है। यहां हजारों प्राचीन सिक्के और नोट का वह समुद्र हैं, जो अपना-अपना खास इतिहास व समय काल लिए हुए दर्शकों को चौका रहा है। विशेष बात यह है कि इनमें चोल वंश व ब्रिटिश साम्राज्य के साथ दो से ढाई हजार वर्ष पूर्व की दुर्लभ मुद्राएं अपनी खास चमक लिए हुए मौजूद हैं।

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