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दिल्ली: बीमार पिता को लिवर दान करने के लिए नाबालिग बेटे ने खटखटाया अदालत का दरवाजा, रिपोर्ट जांच के बाद मिलेगी अनुमति

Mon, 18 Oct 2021 08:56 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Mon, 18 Oct 2021 08:56 PM IST
सार

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा कि अगर 17 साल 9 महीने का लड़का आईएलबीएस से मिली अपनी मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार अपने लीवर का एक हिस्सा दान करने के लिए फिट पाया जाता है तो उपयुक्त प्राधिकरण द्वारा गठित समिति उसे आवश्यक मंजूरी देने पर विचार करेगी।

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Delhi Highcourt to give permition to a minor for donating liver to his father after going through medical report
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटे द्वारा अपने बीमार पिता को लीवर का हिस्सा दान में देने के मुद्दे पर नई चिकित्सा रिपोर्ट की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। अदालत ने कमेटी को नाबालिग की नई चिकित्सा रिपोर्ट का पुन: निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा कि उम्मीद जताई जा रही है कि अगर 17 साल और 9 महीने का लड़का लिवर और बिलियरी साइंसेज संस्थान (आईएलबीएस) से मिली अपनी मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार अपने लीवर का एक हिस्सा दान करने के लिए फिट पाया जाता है तो उपयुक्त प्राधिकरण द्वारा गठित समिति उसे आवश्यक मंजूरी देने के लिए अपनी पहले की रिपोर्ट पर पुनर्विचार करेगी। अदालत ने कहा कि ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि उसके पिता की जान बचाई जा सके।
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अदालत ने कहा कि इस मामले में शामिल तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता को 16 से 20 अक्तूबर के बीच किसी भी तारीख को मामले की लिस्टिंग के लिए उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी जाती है। फिलहाल अदालत ने मामले की सुनवाई 21 अक्तूबर तय की है।
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अदालत को बताया गया कि लड़के की नई मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था, जिसमें कहा गया कि समिति द्वारा पूर्व में याचिकाकर्ता के अनुरोध को अस्वीकार करने का एकमात्र कारण इस तथ्य पर आधारित था कि लड़के की फिटनेस के कुछ पैरामीटर निर्धारित सीमा के भीतर नहीं थे। 

अदालत ने 27 सितंबर को इस मामले में पेश रिपोर्ट व तय निमयों पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने कहा कि किसी की जान बचाने के लिए नियमों में छूट दी जा सकती है।
कोर्ट को बताया गया था कि पहले की मेडिकल रिपोर्ट में लड़के के पैरामीटर निर्धारित सीमा के भीतर नहीं थे और वह लिवर डोनेशन के लायक नहीं था। अदालत ने अस्पताल को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि डॉक्टरों के इलाज की राय के साथ-साथ सभी नई मेडिकल रिपोर्टों की प्रतियां समिति को सौंपी जाएं।

अदालत ने इससे पहले लड़के की उस याचिका पर दिल्ली सरकार और आईएलबीएस को नोटिस जारी कर अपने बीमार पिता को अपने लीवर हिस्सा दान करने की अनुमति मांगी थी।

याचिकाकर्ता लड़के ने अपनी मां के माध्यम से अस्पताल द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती दी जिसमें उसे अपने लीवर का हिस्सा अपने बीमार पिता को दान करने के लिए उनके आवेदन को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि अस्पताल के अधिकारियों ने मनमाने तरीके से उसके आवेदन को खारिज किया है जबकि नियम असाधारण परिस्थितियों में एक नाबालिग द्वारा लीवर के हिस्से के दान की अनुमति देता है अधिकारियों ने इस पहलू को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है।

याचिका के अनुसार लड़के की मां और बड़े भाई को मेडिकल आधार पर अपने अंगदान करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया है और अब उसे अनुमति देने से भी इनकार कर दिया गया है। याची ने कहा कि लड़के का मामला असाधारण है और डॉक्टरों की राय के अनुसार उसके पिता के लीवर की तत्काल प्रत्यारोपण की आवश्यकता है इसलिए आवश्यक अनुमति प्रदान की जानी है।
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