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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi High Court seeks response from Center and NBI on plea challenging reducing NEET PG 2023 cut-off percenti

NEET PG 2023: दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र को नोटिस, कट-ऑफ परसेंटाइल को शून्य करने से जुड़ा है मामला

Wed, 27 Sep 2023 05:59 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 27 Sep 2023 05:59 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने नीट पीजी 2023 कट-ऑफ परसेंटाइल को शून्य करने के खिलाफ चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और एनबीआई से जवाब मांगा है। तीन डॉक्टरों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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Delhi High Court seeks response from Center and NBI on plea challenging reducing NEET PG 2023 cut-off percenti
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : Google

विस्तार

उच्च न्यायालय ने नीट-पीजी 2023 परीक्षा में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए योग्यता प्रतिशत को घटाकर शून्य यानी सभी श्रेणियों में शून्य से 40 अंक कम करने के खिलाफ विभिन्न डॉक्टर उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय व अन्य से जवाब मांगा है।

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न्यायमूर्ति पुरुषइंद्र कुमार कौरव ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अलावा नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी से जवाब मांगा है। यह याचिका तीन एमबीबीएस डॉक्टरों द्वारा दायर की गई है जिन्होंने 5 मार्च को एनईईटी पीजी परीक्षा दी थी और काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग ले रहे है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 20 सितंबर को जारी एक अधिसूचना को चुनौती दी है जिसमें परीक्षा के लिए अर्हता प्रतिशत कम कर दिया गया है।

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पात्रता मानदंड को घटाकर शून्य प्रतिशत यानी शून्य से 40 अंक करने से एनईईटी पीजी परीक्षा आयोजित करने का मूल उद्देश्य ही विफल हो गया है। याचिका में कहा गया है कि यदि पात्रता के भागफल को ही कमजोर कर दिया जाता है, तो यह राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के पूरे उद्देश्य को भी धूमिल कर देता है।

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याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्रालय को एक अभ्यावेदन लिखकर विवादित आदेश के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा और इसे वापस लेने का अनुरोध किया। हालाँकि, कोई उत्तर नहीं मिला।

विवादित आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए पूर्वाग्रहपूर्ण है, जिन्होंने काउंसलिंग प्रक्रिया के दूसरे दौर से बाहर होने का विकल्प चुना था, क्योंकि यह पूर्वव्यापी रूप से संचालित होना चाहता है। अभ्यर्थियों ने मोप अप राउंड में बेहतर सीट की उम्मीद में दूसरे दौर से बाहर होने का विकल्प चुना था, जो पहले आयोजित किया जाता है। हालांकि, हर साल, प्रस्तावित तीसरे राउंड में सीटों का रूपांतरण अलग होता है और पूर्ववर्ती मॉप अप राउंड की तुलना में काफी कम होता है, ऐसे में, विवादित आदेश ने उम्मीदवारों के परिकलित दृष्टिकोण को खराब कर दिया है।

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