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फैसला: हाईकोर्ट का खुर्शीद की किताब पर रोक से इनकार, याचिकाकर्ता से कहा-लोगों को बताएं कि वे किताब न खरीदें
Thu, 25 Nov 2021 05:17 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 25 Nov 2021 05:17 PM IST
सार
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की पुस्तक सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन आवर टाइम्स के प्रकाशन, प्रसार पर रोक की याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने याची से कहा लोगों को बताए कि वे किताब न खरीदें और न ही इसे पढ़ें।
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सलमान खुर्शीद (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की पुस्तक सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन आवर टाइम्स के प्रकाशन, प्रसार और बिक्री पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अगर लोग इतना संवेदनशील महसूस कर रहे हैं तो वे क्या कर सकते है।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने वकील विनीत जिंदल द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याची ने दावा किया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री की किताब दूसरों के विश्वास को प्रभावित करती है क्योंकि यह हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हराम जैसे कट्टरपंथी समूहों से करती है।
अदालत ने कहा लोगों से कहें कि वे किताब न खरीदें और न ही इसे पढ़ें। लोगों को बताएं कि यह बुरी तरह से लिखी गई और कुछ बेहतर पढ़ें। अदालत ने कहा अगर लोग इतना संवेदनशील महसूस कर रहे हैं तो हम क्या कर सकते हैं।
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याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि पुस्तक के परिणामस्वरूप सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है और शांति बनाए रखना सभी व्यक्तियों का कर्तव्य है।
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न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने वकील विनीत जिंदल द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याची ने दावा किया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री की किताब दूसरों के विश्वास को प्रभावित करती है क्योंकि यह हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हराम जैसे कट्टरपंथी समूहों से करती है।
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अदालत ने कहा लोगों से कहें कि वे किताब न खरीदें और न ही इसे पढ़ें। लोगों को बताएं कि यह बुरी तरह से लिखी गई और कुछ बेहतर पढ़ें। अदालत ने कहा अगर लोग इतना संवेदनशील महसूस कर रहे हैं तो हम क्या कर सकते हैं।
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याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि पुस्तक के परिणामस्वरूप सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है और शांति बनाए रखना सभी व्यक्तियों का कर्तव्य है।
17 नवंबर को निचली अदालत के अतिरिक्त सिविल जज ने भी समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाओं को कथित रूप से आहत करने के लिए पुस्तक के प्रकाशन, प्रसार और बिक्री को रोकने के लिए हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा याचिका पर एक पक्षीय निर्णय के तहत पुस्तक पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि लेखक और प्रकाशक को किताब लिखने और प्रकाशित करने का अधिकार है।