दिल्ली: 95 लाख रुपये का मुआवजा देने के प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के फैसले को हाईकोर्ट ने किया रद्द
जस्टिस वी कामेश्वर राव ने शुक्रवार को डीपीसीसी और सोसायटी के अधिवक्ताओं की दलील को सुनने के बाद सात जुलाई 2021 को दिए गए आदेश को रद्द कर दिया था। यह आदेश डीपीसीसी ने पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं करने पर जारी किया था।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया सीईटीपी सोसायटी पर लगाए गए 95 लाख रुपये के पर्यावरण मुआवजा लगाने के आदेश को रद्द कर दिया है। याचिकाकर्ता सोसायटी ने यह कहते हुए डीपीसीसी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी कि यह आदेश उसके तर्क को सुने बिना ही दे दिया गया।
जस्टिस वी कामेश्वर राव ने शुक्रवार को डीपीसीसी और सोसायटी के अधिवक्ताओं की दलील को सुनने के बाद सात जुलाई 2021 को दिए गए आदेश को रद्द कर दिया था। यह आदेश डीपीसीसी ने पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं करने पर जारी किया था। पीठ ने डीपीसीसी के वकील की दलील पर भी गौर किया। उन्होंने कहा कि कमेटी याचिकाकर्ता की दलील सुनेगी।
सोसायटी का आरोप- समिति ने जवाब पर विचार किए बिना लगाया जुर्माना
कमेटी ने अधिवक्ता एसके भट्टाचार्य के माध्यम से यह याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि याचिकाकर्ता संस्था औद्योगिक नालों की सफाई करती है। उसे 21 अप्रैल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने दलील दी कि नोटिस का जवाब चार मई 2021 को दिया गया। इसके बावजूद समिति ने उस जवाब पर विचार किए बिना ही संस्था पर इतना भारी जुर्माना लगा दिया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने समिति के आदेश को रद्द करते हुए समिति को आदेश दिया कि वह इस आदेश के दो सप्ताह के अंदर याचिकाकर्ता को मामले की सुनवाई की तारीख व समय बताए।