सवाल: हाई कोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार से मांगा जवाब, पूछा- दोबारा क्यों नहीं करा रहे RT-PCR टेस्ट?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Tue, 01 Jun 2021 10:39 PM IST

सार

गौरतलब है कि आईसीएमआर ने 4 मई 2021 को एक एडवायजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी व्यक्ति का दोबारा आरटी-पीसीआर टेस्ट करने की जरूरत नहीं है। इसके बाद एडवोकेट करन आहूजा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करके मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : PTI
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

एक बार कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद किसी भी नागरिक का दोबारा आरटी-पीसीआर टेस्ट नहीं कराने को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया। अदालत ने इस मामले में मंगलवार (1 जून) को केंद्र सरकार, आईसीएमआर और दिल्ली सरकार को नोटिस भेजा। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, आईसीएमआर और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। इस मामले में अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। 
विज्ञापन


गौरतलब है कि आईसीएमआर ने 4 मई 2021 को एक एडवायजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी व्यक्ति का दोबारा आरटी-पीसीआर टेस्ट करने की जरूरत नहीं है। इसके बाद एडवोकेट करन आहूजा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करके मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया। याचिका में करन ने कहा कि उनके माता-पिता 28 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हो गए थे। इसके बाद दिल्ली सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत उन्हें 17 दिन तक होम आइसोलेशन में रखा गया। आहूजा की ओर से एडवोकेट कुलदीप जौहरी, एडवोकेट अनुभव त्यागी और एडवोकेट रजत भाटिया मामले की पैरवी कर रहे हैं। 


करन ने अदालत को बताया कि इस दौरान उनके घर के बाहर सिविल डिफेंस के कर्मचारी तैनात कर दिए गए। उन सुरक्षाकर्मियों ने करन व उनके परिजनों को जरूरी सामान खरीदने के लिए भी घर से बाहर नहीं जाने दिया। इसके लिए कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट मांगी गई। ऐसे में करन और उनके माता-पिता 18 मई को सुल्तानपुरी स्थित नजदीकी डिस्पेंसरी गए, जहां काउंटर पर मौजूद मेडिकल स्टाफ ने उनका कोरोना टेस्ट करने से साफ इनकार कर दिया। मेडिकल स्टाफ का कहना था कि उन्हें आदेश मिले हैं कि उन लोगों के दोबारा टेस्ट न किए जाएं, जो संक्रमित हो चुके हैं। 

एडवोकेट करन आहूजा का कहना है कि इस तरह कोरोना टेस्ट करने से इनकार करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत निहित उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। डिस्पेंसरी ने टेस्ट से इनकार के पीछे आईसीएमआर की ओर से 4 मई को जारी आदेश का हवाला दिया। इस आदेश में कहा गया है कि उन व्यक्तियों का आरटी-पीसीआर टेस्ट दोबारा न किया जाए, जो एंटीजन या आरटी-पीसीआर टेस्ट में एक बार संक्रमित पाए जा चुके हैं। 

आहूजा का कहना है कि चार मई को आईसीएमआर की ओर से जारी की गई एडवायजरी मनमानी, भेदभावपूर्ण और एक विरोधाभासी स्थिति पैदा करती है, क्योंकि प्रतिवादियों (केंद्र, आईसीएमआर और दिल्ली सरकार) द्वारा जारी कई अन्य अधिसूचनाओं में निगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट को अनिवार्य किया गया है। याचिकाकर्ता ने अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की दोबारा जांच कराने की अनुमति देने का अनुरोध भी किया।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00