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Delhi High Court: विवाह में पसंद की स्वतंत्रता भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का एक आंतरिक हिस्सा

Tue, 25 Oct 2022 04:26 PM IST
Digvijay Singh पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 25 Oct 2022 04:26 PM IST
सार

अदालत ने यह टिप्पणी उस महिला के परिवार द्वारा कथित तौर पर हत्या के प्रयास और शारीरिक हमले से जुड़े एक मामले से उत्पन्न जमानत याचिकाओं पर विचार करते हुए की, जिसने महिला के परिवार की इच्छा के खिलाफ उससे शादी की थी। 

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Delhi High Court Freedom of choice in marriage an intrinsic part of Article 21 of the Constitution of India
दिल्ली हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि आस्था के सवालों का जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता पर कोई असर नहीं पड़ता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि  जीवन साथी चुनने की स्वतंत्रता अनुच्छेद 21 का एक आंतरिक हिस्सा है। जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां जोड़ों का कानूनी रूप से अपनी मर्जी और इच्छा से विवाह किया जाता है। पुलिस से कानून के अनुसार तेजी से और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने कहा कि पुलिस को ऐसे जोड़ों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने चाहिए। अगर वे अपने परिवार के सदस्यों सहित दूसरों से शत्रुता और अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित हैं।

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अदालत ने यह टिप्पणी उस महिला के परिवार द्वारा कथित तौर पर हत्या के प्रयास और शारीरिक हमले से जुड़े एक मामले से उत्पन्न जमानत याचिकाओं पर विचार करते हुए की, जिसने महिला के परिवार की इच्छा के खिलाफ उससे शादी की थी। शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता की पत्नी के परिवार के सदस्यों ने उनका अपहरण कर लिया और उसकी बेरहमी से पिटाई की। उसके निजी अंग को कुल्हाड़ी से काट दिया और चाकू से भी चोट पहुंचाई।

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अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दंपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उनकी शिकायत पर संबंधित पुलिस स्टेशन द्वारा शुरू नहीं किए गए थे जब उनसे तत्परता के साथ कार्रवाई करने की उम्मीद की गई थी। और इस तरह की किसी भी चूक को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। और इस तरह उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। जो जिम्मेदार हैं।

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अपराध की गंभीर प्रकृति और जिस भयानक तरीके से हमला किया गया था, उसे देखते हुए अदालत ने कथित तौर पर हमले में शामिल पत्नी की मां और दादी को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने, हालांकि, पत्नी की बहन को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर जमानत दे दी, यह देखते हुए कि कोई सक्रिय भूमिका उसके लिए जिम्मेदार नहीं थी।

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