दिल्ली: हाईकोर्ट ने हर्बल हुक्का की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका की खारिज
अदालत ने कहा ऐसे में एक रेस्तरां मालिक द्वारा याचिका पर कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता। दिल्ली सरकार के वकील संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि सरकारी अधिकारी विशेषज्ञों और व्यापक जनहित के परामर्श से महामारी की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली सरकार को रेस्तरां में हर्बल हुक्का की बिक्री और सेवा में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश देने की मांग याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने कहा कि 11 जनवरी को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा कोविड-19 के सकारात्मक मामलों में वृद्धि के कारण पारित एक आदेश के आधार पर सभी रेस्तरां और पब बंद कर दिए गए हैं।
अदालत ने कहा ऐसे में एक रेस्तरां मालिक द्वारा याचिका पर कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता। दिल्ली सरकार के वकील संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि सरकारी अधिकारी विशेषज्ञों और व्यापक जनहित के परामर्श से महामारी की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
दिल्ली सरकार के वकील ने रखा तर्क
उन्होंने कहा कि जब पिछले साल नवंबर में अदालत ने रेस्तरां में हर्बल हुक्का की बिक्री की अनुमति देने के लिए एक आदेश पारित किया था, तब कोविड -19 मामलों में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। प्रतिबंध का आदेश दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग का था न कि डीडीएमए का।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अनुभव सिंह ने कहा कि अदालत ने पिछले साल 16 नवंबर को कोविड नियमों के पालन के तहत हर्बल हुक्का की बिक्री और सेवा की अनुमति दी थी। ऐसे में सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि हर्बल हुक्का पर प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(द्द), और अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत अधिकारों का उल्लंघन है।