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लाल किला हिंसा और दंगा: दिल्ली सरकार ने मामले की सुनवाई में एलजी द्वारा एसपीपी की नियुक्ति को बताया गैरकानूनी

Fri, 26 Nov 2021 07:20 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Fri, 26 Nov 2021 07:20 PM IST
सार

दिल्ली सरकार की ओर से ही वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मामला बहुत जरूरी है, लेकिन प्रतिवादियों, उपराज्यपाल और केंद्र ने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है।

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Delhi government said illegal calls appointment of SPP by LG in Red Fort Violence and delhi Riot hearing of case 
अरविंद केजरीवाल-अनिल बैजल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि इस साल की गणतंत्र दिवस हिंसा और पिछले साल के दंगों से जुड़े मामलों में पुलिस द्वारा चुने गए वकीलों को उपराज्यपाल द्वारा विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त करने से जांच एजेंसी और सरकारी पक्ष के बीच ‘कोई अंतर’ नहीं रह जाएगा। उन्होंने उपराज्यपाल के निर्णय को गैरकानूनी बताया है।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में अभियोजक अदालत के अधिकारी होते हैं, लेकिन इस समय अभियोजकों और पुलिस के बीच पूरा तालमेल है। अदालत इन नियुक्तियों को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि पुलिस और अभियोजन में आज कोई अंतर नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आज समूची दंड प्रक्रिया में किस तरह की निष्पक्षता रह गई है? उन्होंने कहा कि अभियोजकों की नियुक्ति सरकार के अधिकार क्षेत्र में है और उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह मानने के लिए बाध्य हैं।
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दिल्ली सरकार की ओर से ही वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मामला बहुत जरूरी है, लेकिन प्रतिवादियों, उपराज्यपाल और केंद्र ने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। पीठ ने केद्र सरकार, उपराज्यपाल व अन्य को मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 28 जनवरी तय की है।


दिल्ली सरकार ने इस साल 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली और फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामलों में हिंसा से संबंधित मामलों में पेश होने और मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली पुलिस के चुने हुए वकीलों को विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त करने के उपराज्यपाल के 23 जुलाई के आदेश को चुनौती दी है। सरकार ने दलील दी है कि इससे हितों का गंभीर टकराव होता है।

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