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इस बार दिल्ली चुनाव से गायब हो गए वे मुद्दे, जो पड़े थे शीला सरकार पर भारी

Fri, 10 Jan 2020 06:40 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 10 Jan 2020 06:40 PM IST
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delhi election 2020: Delhi full statehood, corruption and inflation issues are missing in election
मोदी बनाम केजरीवाल - फोटो : Social Media

दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभी दल अपने चुनावी तीर-तरकश लेकर मैदान में डट गए हैं। आम आदमी पार्टी अपने पांच साल के कार्यकाल, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विपक्षी दलों को ललकार रही है, तो भाजपा उसकी नाकामियों को भुनाने की कोशिश कर रही है। तीसरे प्रमुख दल कांग्रेस ने शीला दीक्षित सरकार के समय किये गए कामकाज को लेकर आप सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

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लेकिन इस पूरी चुनावी मुहिम में कुछ ऐसे मुद्दे गायब से हो गए हैं, जिन्होंने कभी दिल्ली की राजनीति में बड़ा हंगामा मचाया था और सरकारों को हिला दिया था। इनमें दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग से लेकर जनलोकपाल, प्याज की महंगाई तक शामिल हैं। 
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इन मुद्दों की जगह लोक लुभावन मुफ्त की योजनाओं ने ले ली है। आम आदमी पार्टी सरकार की मुफ्त की योजनाओं के बाद भाजपा और कांग्रेस में अपने घोषणापत्रों में और ज्यादा मुफ्त सुविधाएं देने की होड़ मच गई है।

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जनलोकपाल और भ्रष्टाचार भी अब मुद्दा नहीं

इस चुनाव में भाजपा ने अरविंद केजरीवाल सरकार के अनेक मंत्रियों के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने की कोशिश की। कई मंत्रियों के कार्यालय, आवास से लेकर उनके अनेक ठिकानों पर छापेमारी की गई। अरविंद केजरीवाल पर भी भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के आरोप लगे, तो मनीष सिसोदिया के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।


स्कूलों के भवनों के निर्माण में हुए खर्च को लेकर भाजपा सांसद मनोज तिवारी, प्रवेश वर्मा और हरीश खुराना ने अनेक प्रेस कांफ्रेंस की, इसका खूब प्रचार किया।

विधायक अमानतुल्लाह खान के ऊपर वक्फ बोर्ड में गलत तरीके से अपने लोगों की भर्ती करने से लेकर उसके फंड में गबन करने का भी आरोप लगाया गया, लेकिन इसके बाद भी भाजपा भ्रष्टाचार को इस चुनाव में मुद्दा बनाने में कामयाब नहीं हो पाई।

भ्रष्टाचार के आरोपों की आंधी ले डूबी थी शीला सरकार को

जबकि इसके पूर्व के चुनाव में यही भ्रष्टाचार कांग्रेस सरकार के पतन का कारण बना था। दरअसल, यूपीए-2 के कार्यकाल के अंतिम दिनों में आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' और अन्ना हजारे के साथ मिलकर भ्रष्टाचार को बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया था।

माना जाता है कि यूपीए के खिलाफ खुल रहे अनेक घोटालों के मुद्दे की आग में दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार भी खत्म हो गई, जबकि शीला सरकार ने अपने कार्यकाल में दिल्ली को शानदार शहर बनाने में बड़ा काम किया था। लेकिन शीला सरकार के काम भी उसे भ्रष्टाचार की आंधी में ढहने से नहीं रोक सके।

 

इसी प्रकार जनलोकपाल का मुद्दा भी अब सत्ता पक्ष और विपक्ष कोई नहीं उठा रहा है। 

पूर्ण राज्य का मुद्दा आप ने छोड़ा

दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है। यहां के कामकाज में केंद्र का दखल हमेशा बना रहता है। लेकिन केंद्र का यह दखल हमेशा यहां की राजनीति पर भारी पड़ता रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग खूब जोर-शोर से उठाई थी।

लेकिन चुनाव में उसे इसका कोई लाभ नहीं मिला और विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाली पार्टी लोकसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर खिसक गई। अरविंद केजरीवाल से जब इस मुद्दे को दुबारा उठाने के संदर्भ में पूछा गया, तो उन्होंने इस पर सहमति जरूर जताई, लेकिन इसे चुनावी मुद्दा बनाने जैसा सकारात्मक रुख नहीं दिखाया।  
 

दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का मुद्दा इसके पहले भाजपा के मदनलाल खुराना ने भी अपने समय में खूब उठाया था, लेकिन आज जबकि उसकी केंद्र में भी सरकार है, और अगर वह चाहे तो अपनी ही इस पुरानी मांग को अमलीजामा पहना सकती है, पार्टी ने ही इस मुद्दे से दूरी बना ली है।

कांग्रेस इस मांग का समर्थन जरूर करती रही है, लेकिन पार्टी की ही दिग्गज नेता शीला दीक्षित इन मुद्दों से दूरी बनाती रही थीं।

महंगी प्याज नहीं बनी मुद्दा

साल 1998 में प्याज की महंगाई दिल्ली चुनाव में बड़ा मुद्दा बना था। भाजपा के साहिब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री थे। उनके कार्यकाल के अंतिम दिनों में प्याज की महंगाई बड़ा मुद्दा बनने लगी थी। कांग्रेस सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने लगी थी।

चुनाव में अपनी बुरी स्थिति देख भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री बदल दिया और साहिब सिंह वर्मा की जगह सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बना दिया। लेकिन धारदार भाषण देने वाली और साफ-स्वच्छ छवि की सुषमा स्वराज भी भाजपा की सत्ता बचाने में कामयाब नहीं हो पाईं। भाजपा चुनाव में कांग्रेस के हाथों हार गई।

इन मुद्दों ने बनाई जगह

अरविंद केजरीवाल सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में लोगों को मुफ्त की योजनाओं की कई सौगातें दीं। 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, 20 हजार लीटर पानी और मुफ्त वाई-फाई के साथ उसकी सीसीटीवी लगाने और मार्शल तैनात करने की योजना सुर्खियों में रही। शिक्षा और स्वास्थ्य में उसके काम की काफी सराहना हुई। 

 

इनसे चुनावी टक्कर लेने के लिए कांग्रेस ने चुनाव जीतने पर लोगों को 600 यूनिट बिजली, पांच हजार रुपये मासिक पेंशन और महिलाओं, छात्रों और बुजुर्गों को मुफ्त डीटीसी बस यात्राओं की घोषणा की है।



वहीं भाजपा ने भी सरकार बनने पर आप सरकार की तरफ से दी जा रही सुविधाओं के बदले पांच गुना ज्यादा सुविधाएं देने की घोषणा की है। पार्टी पहले ही कच्ची कालोनी के लोगों को पक्के मकान देने का वायदा कर चुकी है।   

 

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