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अनिल देशमुख मामला: वकील आनंद डागा और उप निरीक्षक अभिषेक तिवारी को जमानत नहीं
Wed, 08 Sep 2021 09:46 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 08 Sep 2021 09:46 PM IST
सार
सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश विमल कुमार यादव ने दोनों को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि अभी मामले की जांच विचाराधीन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल जमानत देने का कोई आधार नहीं है।
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अनिल देशमुख
- फोटो : ANI
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विस्तार
दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को मुंबई के वकील आनंद डागा और उप निरीक्षक अभिषेक तिवारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। उनपर महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ चल रही जांच से संबंधित संवेदनशील दस्तावेज लीक करने का आरोप है।
सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश विमल कुमार यादव ने दोनों को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि अभी मामले की जांच विचाराधीन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल जमानत देने का कोई आधार नहीं है।
बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। उनके मुवक्किल ने जांच में सहयोग किया है। ऐसे में जमानत प्रदान की जाए। वहीं अभियोजन पक्ष ने मामले की जांच को देखते हुए जमानत याचिका पर आपत्ति जताई।
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अदालत ने छह सितंबर को सीबीआई की रिमांड बढ़ाने की याचिका खारिज करते हुए डागा और तिवारी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अदालत ने सीबीआई को उन्हें 20 सितंबर को पेश करने का निर्देश दिया था।
डागा, तिवारी और अज्ञात अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अनुचित लाभ के एवज में संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेजों को लीक किया।
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सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश विमल कुमार यादव ने दोनों को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि अभी मामले की जांच विचाराधीन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल जमानत देने का कोई आधार नहीं है।
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बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। उनके मुवक्किल ने जांच में सहयोग किया है। ऐसे में जमानत प्रदान की जाए। वहीं अभियोजन पक्ष ने मामले की जांच को देखते हुए जमानत याचिका पर आपत्ति जताई।
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अदालत ने छह सितंबर को सीबीआई की रिमांड बढ़ाने की याचिका खारिज करते हुए डागा और तिवारी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अदालत ने सीबीआई को उन्हें 20 सितंबर को पेश करने का निर्देश दिया था।
डागा, तिवारी और अज्ञात अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अनुचित लाभ के एवज में संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेजों को लीक किया।