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बटला हाउस एनकांउटर: आंतकी आरिज को फांसी की सजा पर बोला बचाव पक्ष-गलत तरीके फंसाया हाईकोर्ट जाएंगे, पढ़ें पूरा मामला

Mon, 15 Mar 2021 11:19 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 15 Mar 2021 11:19 PM IST
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Delhi Court awards death penalty to convict Ariz Khan in 2008 Batla House encounter case Defendants says wrongly framed will go to High Court
ariz khan - फोटो : vivek nigam
अदालत ने वर्ष 2008 में हुए चर्चित बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में दोषी ठहराए गए आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी आरिज खान उर्फ जुनैद को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे दिल्ली पुलिस के निरीक्षक मोहन चंद शर्मा की हत्या व अन्य पुलिसकर्मियों पर की गई फायरिंग को जघन्य से जघन्यतम अपराध की श्रेणी में माना है। इतना ही नहीं अदालत ने जुनैक पर 11 लाख रुपये का जुर्माना भी किया है।
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साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने अभिभोयन पक्ष के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि यह एक आम हत्या का मामला नहीं है कि बल्कि एक कानून का पालन करवाने वाले अधिकारी की हत्या थी जो न्याय का रक्षक था । पुलिस की और से पेश सरकारी वकील एटी अंसारी ने अदालत ने दोषी को फांसी की सजा प्रदान करने का आग्रह करते हुए कहा कि दोषी के अपराध को देखते हुए कड़ी सजा देना जरूरी है ताकि समाज व इसके प्रकार की गतिविधियों में लिप्त अपराधियों को संदेश मिल सके।
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अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष पहले ही तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर उसका अपराध बिना शक साबित कर चुका है और उसके अपराध को देखते हुए उनकी नजर में यह जघन्य से जघन्यतम श्रेणी में आता है। अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उनके मुवक्किल को न्यूनतम सजा प्रदान की जाए। अदालत ने कहा दोषी सहानुभूति पाने का हकदार नहीं है। अदालत ने कहा कि दोषी को फांसी की सजा देते है।
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अदालत ने दोषी पर 11 लाख रुपये जुर्माना भी किया है। अदालत ने कहा कि इस राशि में से 10 लाख रुपये मृतक शर्मा के परिवार को बतौर मुआवजा राशि दी जाए। अदालत ने इस मामले में 8 मार्च को अभियुक्त आरिफ को दोषी ठहराया था। इस मामले के अभियुक्त शहजाद को अदालत वर्ष 2013 में ही उम्रकैद की सजा दे चुकी है। इनकाउंटर के दौरान आरिज और शहजाद भागने में सफल रहे थे।

इस काउंटर में एनकाउंटर में पुलिस निरीक्षक मोहन चंद शर्मा सहित दो आतंकवादियों की मुठभेड़ में मौत हो गई थी। अदालत ने अभियुक्त आरिज खान को आईपीसी की धारा 186, 333, 353, 302, 307 , 174ए एवं आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी करार दिया था। 

फरवरी 2018 में स्पेशल सेल ने उसे नेपाल से गिरफ्तार किया था। आरिज पर भारत में कई जगहों पर बम धमाके करने के आरोप हैं, जिनमें 165 लोग मारे गए हैं। आरोप है कि धमाकों के बाद आरिज नेपाल भाग गया था और फर्जी पासपोर्ट पर सलीम के नाम से छुपा हुआ था।

बचाव पक्ष ने कहा अपील करेंगे
बचाव पक्ष के अधिवक्ता एमएस खान ने कहा कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया गया है और वे हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील करेंगे।

अभियोजन पक्ष ने फैसले को उचित ठहराया
सरकारी वकील एटी अंसारी ने फैसले को उचित बताते हुए कहा कि पुलिस ने काफी मेहनत से साक्ष्य एकत्रित किए। ऐसे फैसले से समाज में उचित संदेश जाएगा।

क्या है मामला

13 सितंबर 2008 को दिल्ली के करोल बाग, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और ग्रेटर कैलाश में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। उस ब्लास्ट में 26 लोग मारे गए थे, जबकि 133 घायल हो गए थे। दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया था कि बम ब्लास्ट को आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने अंजाम दिया था। इस ब्लास्ट के बाद 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पांच आतंकी बाटला हाउस के एक मकान में मौजूद हैं।

19 सितंबर 2008 की सुबह आठ बजे इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा ने स्पेशल सेल के लोधी कॉलोनी स्थित ऑफिस में मौजूद एसआई राहुल कुमार सिंह फोन किया। उन्होंने राहुल को बताया कि आंतकी एल-18 में है। राहुल सिंह अपने साथियों एसआई रविंद्र त्यागी, एसआई राकेश मलिक, हवलदार बलवंत, सतेंद्र विनोद गौतम आदि पुलिसकर्मियों को लेकर प्राइवेट गाड़ी में रवाना हो गए।

इस टीम के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा डेंगू से पीड़ित अपने बेटे को नर्सिंग होम में छोड़ कर बाटला हाउस के लिए रवाना हो गए। वह अब्बासी चौक के नजदीक अपनी टीम से मिले। सभी पुलिस वाले सिविल कपड़ों में थे। 

उस वक्त पुलिस टीम को यह पूरी तरह नहीं पता था कि बाटला हाउस में बिल्डिंग नंबर एल-18 में फ्लैट नंबर 108 में सीरियल बम ब्लास्ट के जिम्मेदार कितने आतंकवादी रह रहे थे। पुलिस के वहां पंहुचते ही आतंकियों ने फायरिंग शुरु कर दी जिसमें मोहन चंद शर्मा की मौत हो गई। 
 
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