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दिल्ली दंगा: सौ खरगोश मिलाकर आप घोड़ा नहीं बना सकते, वैसे सौ संदेह नहीं बन सकते साक्ष्य, अदालत की टिप्पणी

Tue, 02 Mar 2021 11:15 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 02 Mar 2021 11:15 PM IST
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delhi court acquitted two of the accused questioning on delhi police in Delhi riots
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
अदालत ने दिल्ली दंगो से जुड़े हत्या के प्रयास संबंधी एक मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दो आरोपियों को इस आरोप से बरी कर दिया। हांलाकि अदालत ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ दंगा करने व गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने का मामला चलाने का निर्देश दिया है। अदालत ने रूसी कृति अपराध एवं दण्ड को उद्धृत करते हुए कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सौ खरगोश मिलाकर आप घोड़ा नहीं बना सकते और सौ संदेह साक्ष्य नहीं बन सकते।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने आरोपी इमरान और बाबू को भारतीय दंड संहिता की धारा-307 (हत्या का प्रयास) और शस्त्र अधिनियम के आरोप से बरी करते हुए कहा कि यह मामला ऐसा है जिसमें कहीं नहीं है कि किसने गोली चलाई, किस पर चलाई और कहां चलाई गई। अदालत ने सवाल उठाया कि जब मामले में पीड़ित ही नहीं है तो कैसे आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रयास का आरोप लगाया जा सकता है। अदालत ने कहा पुलिस जांच में पीड़ित ही नहीं है और ना ही वह कभी पुलिस के पास नहीं आया। अदालत ने कहा कि पीड़ित ने गोली चलाने के बारे में अथवा भीड़ या दंगाइयों के बारे में कोई बयान नहीं दर्ज कराया।
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अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, (फ्योदोर) दोस्तो एवस्की अपराध एवं दण्ड में कहते हैं सौ खरगोशों को मिलाकर आप घोड़ा नहीं बना सकते हैं और सौ संदेहों को साक्ष्य नहीं बना सकते। यह मामला वेलकम इलाके में राहुल नाम के व्यक्ति पर कथित तौर पर गोली चलाने के सिलसिले में दर्ज किया गया था।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा आपराधिक न्याय प्रणाली के अनुसार आरोपी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए उसके खिलाफ कुछ सामग्री होनी चाहिए। पूर्वाग्रह सबूत का स्थान नहीं ले सकता। 


आरोप पत्र में धारा-307 या शस्त्र कानून के तहत मामला चलाने के लिए कोई सामग्री नहीं है। ऐसे में दोनों आरोपियों को धारा-307 और शस्त्र अधिनियम के आरोप से मुक्त किया जाता है। अदालत ने कहा कि हालांकि दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर कानूनी तरीके से एकत्रित होने एवं दंगा करने के आधार पर मामला चलाया जा सकता है। उन्होंने मामले को मजिस्ट्रेट की अदालत को हस्तांतरित करते हुए कहा कि यह मामला विशेषतौर पर सत्र न्यायालय में सुनने योग्य नहीं है।
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