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दिल्ली : आतंकी का बिहार कनेक्शन, कटिहार के ग्राम प्रधान ने दिया था निवास प्रमाण-पत्र
Sat, 16 Oct 2021 04:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 16 Oct 2021 04:39 AM IST
सार
बिहार के कटिहार जिले से मौलवी ने जानकार से दिलाया था निवास प्रमाण-पत्र।
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आतंकी मोहम्मद अशरफ
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
पुलिस की स्पेशल सेल की गिरफ्त में आए पाकिस्तान के मूल निवासी आतंकी मो. अशरफ उर्फ अली अहमद नूरी को निवासी होने का प्रमाण पत्र बिहार के कटिहार जिले के एक ग्राम प्रधान ने दिया था। अशरफ ने राजस्थान के अलवर में मिले मौलवी से कह दिया था कि कटिहार के गांव में उसकी ननिहाल है। उसके पास वोटर कार्ड बनवाने के लिए कोई कागज नहीं है। उसके कहने के आधार पर ग्राम प्रधान ने वर्ष 2012-13 में अपने लैटरहैड पर लिखकर दे दिया था कि मो. अशरफ उसके गांव का रहने वाला है।
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स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि ग्राम प्रधान के सर्टिफिकेट के आधार पर इसने दिल्ली में शास्त्री पार्क में मकान मालिक का बिजली का बिल लेकर अपना पहचान पत्र व वोटर कार्ड बनवा लिया। वर्ष 2013 में इसने पासपोर्ट बनवा लिया और उससे चार से पांच विदेश यात्राएं कीं। इससे पहले अशरफ ने वर्ष 2010 में तुर्कमान गेट में हैंडीक्राफ्ट का काम शुरू किया।
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वर्ष 2012 में उसने तुर्कमान गेट में ही आर्टिफिशियल ज्वेलरी की दुकान खोली थी। आतंकी ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने वर्ष 2014 में नरेला में हाथ की सफाई सीखी। इसे वह लोगों को जादू-टोना कहकर भरमाता था। वह नरेला में काफी समय तक रहा था। इसके बाद वह मौलवी के वेश में रहने लगा। वह लोगों के घरों में पैठ बनाता और युवाओं को धर्म के नाम पर बरगलाकर जिहादी बनाने की कोशिश करता।
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स्पेशल सेल की जांच में पता चला है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पांच से ज्यादा लोग इसकी मदद करते थे। खास बात यह कि इन लोगों को बखूबी पता था कि अशरफ पाकिस्तान से आया है और उसका इरादा आतंकी वारदात का है। वे अशरफ को धर्म को बढ़ावा देने के नाम पर पैसा भी देते थे। दिल्ली पुलिस को अशरफ के एक बैंक खाते का पता लगा है। पुलिस फिलहाल इसकी डिटेल खंगाल रही है। इसे पाकिस्तान से हर महीने 20-25 हजार रुपये यूनियन मनी ट्रांसफर से आते थे। 10 से 15 हजार रुपये हर महीने वह खुद कमा लेता था। वह एशोआराम से रह रहा था।