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Delhi : जहरीली गैस निगलकर ऑक्सीजन पैदा करेगी छोटी सी डिवाइस, कीमत होगी 10 हजार, जल्द आएगी बाजार

Thu, 08 Jun 2023 05:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 08 Jun 2023 05:48 AM IST
सार

इस डिवाइस से जुड़ा एक बायोमास सिलिंडर प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया से कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों और धूल कणों को अपनी खुराक के तौर पर सोख लेगा और बदले में कमरे के अंदर प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ेगा।

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Delhi: A small device will produce oxygen by swallowing poisonous gas
आई गार्डन एयर प्यूरीफायर को दीवार पर टांग भी सकते हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक छोटी सी डिवाइस जहरीली गैसों को निगल जाएगी और बदले में ऑक्सीजन उत्पन्न करेगी। इस डिवाइस से जुड़ा एक बायोमास सिलिंडर प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया से कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों और धूल कणों को अपनी खुराक के तौर पर सोख लेगा और बदले में कमरे के अंदर प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ेगा। केंद्र और तमिलनाडु सरकार की मदद से दो भारतीय वैज्ञानिकों उमा महेश वी व राजलक्ष्मी ने इसे तैयार किया है।

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अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एक्सपो में प्रदर्शित इस डिवाइस को बनाने वालों ने दावा किया कि बाजार में मौजूद दूसरे एयर प्यूरीफायर से यह डिवाइस सस्ती है। इसमें कई सारे फीचर भी जोड़े गए हैं। जल्द ही इसे आम लोग बाजार से खरीद पाएंगे। एक्सपो में यह डिवाइस लोगों को खूब पसंद आ रही है और कई लोगों ने इसे प्री-बुक भी किया है। निर्माताओं ने इसका डिवाइस का नाम गार्डन एयर प्यूरीफायर रखा है।
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इसकी कीमत 10 हजार रुपये रखी है। पहली बार इसे खरीदने पर इसके साथ चार बायोमास सिलिंडर भी मिलेंगे। दो-तीन महीने बाद ये सिलिंडर बदलने होंगे। इसमें मौजूद बायोमास का घोल पेड पौधों, क्यारियों में डाला जा सकता है, जो पौधों के लिए खाद का काम करेगा। शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या को देखते हुए ये डिवाइस बड़े काम की है और सबसे खास बात ये डिवाइस जीरो अपशिष्ट पैदा करती है। जल्द ही ये देशभर के बाजार में आसानी से मिलने लगेगी। अभी स्टार्टअप्स की वेबसाइट से इसे ऑनलाइन मंगाया जा सकता है।
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2 हजार रुपये होगा सालाना खर्च
इस इंडोर एयर प्यूरीफायर के बायोमास का सालाना खर्च करीब दो हजार रुपये पड़ेगा। प्रत्येक दिन दो से तीन रुपये में ऑक्सीजन मिल सकेगी। इस डिवाइस में एक एयर क्वालिटी मॉनिटर और ब्लूटूथ इनबिल्ड है। इसके ब्लूटूथ को मोबाइल पर इसके एंड्रॉइड एप्लिकेशन से जोड़कर कमरे की एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) को आसानी से जांचा जा सकता है।

मिला एलपीजी से सस्ता ईंधन
खेती से निकलने वाला सूखा कचरा जैसे कि पराली, भूंसा, जूट हो चाहे फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा, अब ये परेशानी का सबब नहीं बनेंगे। बल्कि ये वरदान साबित होंगे। गुजरात के वैज्ञानिक डॉ अरविंद पटेल ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए सूखे कचरे का चूरा बनाकर, फीडर सिस्टम में डालकर इसे प्रोसेस किया जाएगा। इसके बाद सीधे फोटोलाइसिस चैंबर में ले जाकर गैस में तब्दील कर दिया जाएगा। डॉ अरविंद नेे बताया कि इससे बनने वाली गैस एलपीजी या फिर बायो गैस से हल्की होगी। ये गैस मीथेन और हाइड्रोजन का कंपोजीशन होगी। इसका कैलोरीफिकेशन पेट्रोल के बराबर करीब 8000 होगा। इसे पाइप लाइन के माध्यम से घरों में सप्लाई किया जा सकेगा।

गांधीनगर से शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
इसका पायलट प्रोजेक्ट गांधीनगर में शुरू किया गया है। आने वाले समय में पूरे देश में ये पहुंचेगी। डॉ अरविंद इसे गांव इलाके में पहुंचाना चाहते हैं। ये एलपीजी, सीएनजी से 20 फीसदी सस्ती होगी और गांव के आस पास ही इसके प्लांट लगाए जाएंगे, ताकि ग्रामीणों से उनका खेती वाला कचरा आसानी से लिया जा सके और बदले में उन्हें उसकी उचित कीमत भी दी जाएगी। उन्होंने गुजरात के कुछ कॉटन उत्पादन करने वाले किसानों से संपर्क करके अपना स्टार्टअप शुरू किया है।


मेयर्स मीट में कचरे के निस्तारण पर कांफ्रेंस
पर्यावरण एक्सपो के आखिरी दिन बुधवार को आल इंडिया मेयर्स मीट हुई। इसमें देशभर के नगर निगमों के मेयर इकट्ठा हुए। इस मौके पर कचरे के निस्तारण पर चर्चा हुई। कनफेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए (कोरवा) और ग्रीन सोसायटी ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कॉन्फ्रेंस में कोरवा के मुख्य संयोजक कर्नल तेजेन्दर पाल त्यागी ने निगमों से मांग की है कि शहर में कहीं भी खुले में कचरा न डाला जाए। सैनिटरी लैंडफिल साइट, ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर इत्यादि विषयों पर भी चर्चा हुई।

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