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सरकारी अधिकारियों के इलाज के लिए होटल बुक करने के निर्णय को चुनौती

Mon, 10 May 2021 11:58 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 10 May 2021 11:58 PM IST
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Decision of booking hotel for treatment of officials challenged before high court
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल को चार होटलों से लिंक करने संबंधी मुद्दे पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। सरकार ने अपने अधिकारियों व उनके पारिवारिक सदस्यों के कोविड इलाज के लिए चार होटलों में व्यवस्था की है। इस निर्णय को चुनौती दी गई है।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 14 जुलाई तय करते हुए सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा है। यह याचिका फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के सर्जन डॉ कौशल कांत मिश्रा ने अधिवक्ता पूजा धर के माध्यम से दायर की है।
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27 अप्रैल को जारी अधिसूचना में होटल जिंजर में 70 कमरे, होटल पार्क प्लाजा में 50 और होटल लीला एंबियंस में 50 कमरों को राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से जोड़ा गया है जबकि होटल गोल्डन ट्यूलिप में सभी कमरे दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल से जोड़े गए हैं।
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अधिसूचना में दोनों अस्पताल के निदेशक व चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश गया है कि वे इन होटलों में कोविड से पीड़ित अधिकारियों, उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करें। अधिसूचना में कहा गया है कि गंभीर मरीजों को मुख्य अस्पताल में स्थानांतरित किया जा सकता है।
याचिका में अधिसूचना को चुनौती देते हुए तर्क रखा गया है कि एक तरफ दिल्ली में आम लोग ऑक्सीजन बिस्तर की तलाश में भटक रहे हैं। वहीं ऐसा आदेश जारी करना भारत के संवैधानिक का अपमान है।
याची ने कहा कि अधिसूचना का अर्थ है कि कुछ व्यक्तियों का जीवन दिल्ली के 2 करोड़ आम नागरिकों के जीवन से अधिक मूल्य है। याचिका में आम लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दावा किया गया है कि स्वास्थ्य की दृष्टि में अधिकारियों को पहले ही विशेषाधिकार मिला हुआ है।

याची ने अधिसूचना को रद्द करने की आग्रह करते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14-समानता व 21-जीवन का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं।
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