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Hindi News ›   Delhi ›   Death of a prisoner in Tihar Jail High Court issues notice 

तिहाड़ जेल में विचाराधीन कैदी की मौत गंभीर मामला, हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार व जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Wed, 24 Feb 2021 11:52 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Wed, 24 Feb 2021 11:52 PM IST
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Death of a prisoner in Tihar Jail High Court issues notice 
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल में 23 वर्षीय विचाराधीन कैदी की हत्या के मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत दिल्ली सरकार व जेल प्रशासन को तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। याची ने अपने बेटे की हत्या पर कोई भी काईवाई न करने का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इतन ही नहीं उन्होंने पांच करोड़ रुपये मुआवजे दिलवाने का भी आग्रह किया है।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने मृतक दिलशेर आजाद के पिता शेर अली द्वारा याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि तिहाड़ जेल में विचाराधीन कैदी की हत्या का मामला काफी गंभीर है। अदालत ने जेल प्रशासन को मामले से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज को भी संरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 5 मार्च तक के लिए स्थगित करते हुए सरकार व जेल प्रशासन को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए।
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याची के अधिवक्ता अनवर ए खान ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल का बेटा 19 सितंबर 2019 से पश्चिम विहार थाने में दर्ज एक मामले में जेल में है। उन्होंने कहा कि 30 नवंबर 2020 को अली शेर के पास जेल प्रशासन का फोन आया कि उनके बेटे की मृत्यु हो गई है। उन्होंने कहा कि जब शेर अली जेल पंहुचा तो जेल प्रशासन ने उसे सहयोग नहीं किया और न ही बेटे की मौत के संबंध में कोई जानकारी दी। आखिर हरिनगर थाने मे संपर्क से पता चला कि बेटे की मौत हुई है, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी गई।
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उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध के बावजूद याचिकाकर्ता को अपने बेटे की मौत का असली कारण नहीं बताया  गया। आखिर उन्होंने अपने वकील से संपर्क किया तो उनके आने के बाद ही याचिकाकर्ता को पता चल सका कि उसके बेटे की हत्या तिहाड़ जेल के अंदर की गई है और वह भी चाकू से। उन्होंने जेल प्रशासन तिहाड जेल  को देश की सबसे सुरक्षित जेल होने का दावा करता है लेकिन सरेआम एक कैदी की चाकू से हत्या कर दी जाती है।


उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन ने मामले को दबाने के लिए उनके मुवक्किल को काफभ् समय तक अंधेरे में रखा। इतना ही नहीं अली शेर के बेटे की मौत के बाद वह और उसकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों का पूरा भविष्य टूट गया है। ऐसे में दोषी जेल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा उनके मुवक्किल को पांच करोड़ रुपये मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया जाए।
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