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कासगंज में मुनादी कर लोगों को भेजा विदेश
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उत्तर प्रदेश के कासगंज व कुशीनगर के ध्यानार्थ
फर्जी वीजा पर 17 युवकों को भेजा था विदेश
एयरपोर्ट पुलिस ने दो साल से फरार दो एजेंटों को किया गिरफ्तार
यूएई में नौकरी का झांसा देकर थमाया था फर्जी वीजा
इमीग्रेशन पर सभी को पकड़ा, एयरपोर्ट से डिपोर्ट किया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कासगंज में दो साल पहले एजेंटों ने टैंपो पर मुनादी कर युवाओं को यूएई में नौकरी का प्रलोभन दिया। झांसे में आने के बाद 17 युवकों को यूएई का फर्जी वीजा देकर उन्हें वहां भेज दिया, लेकिन यूएई में इमीग्रेशन पर सभी को पकड़ लिया गया और फिर एयरपोर्ट से ही उन्हें डिपोर्ट कर दिया। वापस आने के बाद पीड़ितों की शिकायत पर एयरपोर्ट पुलिस ने एजेंटों के खिलाफ फर्जीवाड़े का मामला दर्ज कर लिया, लेकिन इस मामले में शामिल सभी आरोपी दो साल से फरार थे। अब एयरपोर्ट पर पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों जावेद और मनोज कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उनके एक फरार सहयोगी की तलाश कर रही है।
एयरपोर्ट पुलिस उपायुक्त संजय भाटिया ने बताया कि पकड़े गए एजेंटों की पहचान कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) निवासी जावेद अली और मौजपुर (दिल्ली) निवासी मनोज कुमार शर्मा के रूप में हुई है। आठ अप्रैल, 2017 को यूएई ने 17 भारतीयों को डिपोर्ट किया था। जांच में पता चला कि इन भारतीयों के पास से फर्जी वीजा मिले थे। इन्हें एजेंटों ने नौकरी का झांसा देकर वहां भेजा था और इसके बदले एजेंटों ने पीड़ितों से एक-एक लाख रुपये लिए थे। इसके बाद आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस ने 17 एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
पीड़ितों ने बताया कि सभी कासगंज और उसके आसपास के रहने वाले हैं। सभी नौकरी के लिए विदेश जाना चाहते थे। इस दौरान जावेद ने मुनादी कर विदेश में नौकरी का झांसा दिया। पुलिस ने जावेद की गिरफ्तारी के लिए कई बार उसके घर पर दबिश दी, लेकिन वह फरार हो गया। 17 अप्रैल को एसआई संदीप मलिक के नेतृत्व में पुलिस ने जावेद के गांव भवनौली में छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया। जावेद ने अपराध में शामिल होने की बात कुबूल कर ली। उसने बताया कि सभी पीड़ित उसके आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं। उसके दो सहयोगियों मनोज और प्रिंस यादव ने पीड़ितों को फर्जी वीजा मुहैया करवाया। पुलिस ने मनोज कुमार के बैंक अकाउंट की जांच कर रविवार को उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि प्रिंस यादव गैंग का सरगना है और फर्जी वीजा तैयार करता था। पुलिस प्रिंस की तलाश में दबिश दे रही है।
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फर्जी वीजा पर 17 युवकों को भेजा था विदेश
एयरपोर्ट पुलिस ने दो साल से फरार दो एजेंटों को किया गिरफ्तार
यूएई में नौकरी का झांसा देकर थमाया था फर्जी वीजा
इमीग्रेशन पर सभी को पकड़ा, एयरपोर्ट से डिपोर्ट किया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कासगंज में दो साल पहले एजेंटों ने टैंपो पर मुनादी कर युवाओं को यूएई में नौकरी का प्रलोभन दिया। झांसे में आने के बाद 17 युवकों को यूएई का फर्जी वीजा देकर उन्हें वहां भेज दिया, लेकिन यूएई में इमीग्रेशन पर सभी को पकड़ लिया गया और फिर एयरपोर्ट से ही उन्हें डिपोर्ट कर दिया। वापस आने के बाद पीड़ितों की शिकायत पर एयरपोर्ट पुलिस ने एजेंटों के खिलाफ फर्जीवाड़े का मामला दर्ज कर लिया, लेकिन इस मामले में शामिल सभी आरोपी दो साल से फरार थे। अब एयरपोर्ट पर पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों जावेद और मनोज कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उनके एक फरार सहयोगी की तलाश कर रही है।
एयरपोर्ट पुलिस उपायुक्त संजय भाटिया ने बताया कि पकड़े गए एजेंटों की पहचान कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) निवासी जावेद अली और मौजपुर (दिल्ली) निवासी मनोज कुमार शर्मा के रूप में हुई है। आठ अप्रैल, 2017 को यूएई ने 17 भारतीयों को डिपोर्ट किया था। जांच में पता चला कि इन भारतीयों के पास से फर्जी वीजा मिले थे। इन्हें एजेंटों ने नौकरी का झांसा देकर वहां भेजा था और इसके बदले एजेंटों ने पीड़ितों से एक-एक लाख रुपये लिए थे। इसके बाद आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस ने 17 एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
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पीड़ितों ने बताया कि सभी कासगंज और उसके आसपास के रहने वाले हैं। सभी नौकरी के लिए विदेश जाना चाहते थे। इस दौरान जावेद ने मुनादी कर विदेश में नौकरी का झांसा दिया। पुलिस ने जावेद की गिरफ्तारी के लिए कई बार उसके घर पर दबिश दी, लेकिन वह फरार हो गया। 17 अप्रैल को एसआई संदीप मलिक के नेतृत्व में पुलिस ने जावेद के गांव भवनौली में छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया। जावेद ने अपराध में शामिल होने की बात कुबूल कर ली। उसने बताया कि सभी पीड़ित उसके आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं। उसके दो सहयोगियों मनोज और प्रिंस यादव ने पीड़ितों को फर्जी वीजा मुहैया करवाया। पुलिस ने मनोज कुमार के बैंक अकाउंट की जांच कर रविवार को उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि प्रिंस यादव गैंग का सरगना है और फर्जी वीजा तैयार करता था। पुलिस प्रिंस की तलाश में दबिश दे रही है।
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